
आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि यानी आज पूरे देश में दशहरा (Dussehra 2026) का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह पर्व असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। आज ही के दिन भगवान श्री राम ने लंकापति रावण का वध करके माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। शास्त्रों के अनुसार, विजयादशमी का दिन नया काम शुरू करने, अस्त्र-शस्त्र की पूजा करने और भगवान श्री राम का आशीर्वाद पाने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। ऐसे में आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, जब रावण ने छल से माता सीता का अपहरण कर लिया था, तब भगवान राम ने अपनी वानर सेना के साथ लंका पर आक्रमण किया था। लगातार 10 दिनों तक चले भीषण युद्ध के बाद, आश्विन महीने की दशमी तिथि को भगवान श्री राम ने रावण की नाभि पर बाण चलाकर उसका वध किया था। रावण दहन हमें सिखाता है कि अहंकार और पाप चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में जीत हमेशा सत्य और धर्म की ही होती है।
श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।
कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।
भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।
मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।
एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।
दोहा- जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।
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