गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2026) का पर्व बेहद शुभ माना जाता है। यह भगवान गणेश को समर्पित है। आइए यहां इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना गया है। हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को पूरे देश में गणेश चतुर्थी का महापर्व बेहद उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इसी दिन घर-घर और पंडालों में विधि-विधान से भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की जाती है। साथ ही लोग कठिन व्रत का पालन करते हैं। ऐसे में आइए यहां मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और अनंत चतुर्दशी की सही तिथि जानते हैं।
गणेश चतुर्थी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, गणेश जी का जन्म दोपहर (मध्याह्न काल) के समय हुआ था, इसलिए मध्याह्न काल में ही गणपति बाप्पा की स्थापना और पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि की शुरुआत 14 सितंबर 2026 को रात 11 बजकर 48 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 15 सितंबर 2026 को रात 8 बजकर 39 मिनट पर होगा। साथ ही गणेश विसर्जन 25 सितंबर 2026 दिन शुक्रवार को किया जाएगा।
गणपति स्थापना शुभ मुहूर्त
15 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजकर 1 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 28 मिनट तक।
गणेश चतुर्थी पूजा विधि
बप्पा को घर लाते समय और स्थापित करते समय शास्त्रों में बताए गए कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है -
स्थान की शुद्धि: घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या पूर्व दिशा में पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करें और गंगाजल छिड़ककर उसे पवित्र करें।
चौकी तैयार करें: एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर अक्षत (चावल) का आसन बनाएं।
मूर्ति स्थापना: शुभ मुहूर्त में गणेश जी की मूर्ति को वेदी पर स्थापित करें। ध्यान रखें कि बप्पा का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर हो।
संकल्प व आह्वान: हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत एवं पूजन का संकल्प लें और 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जप करते हुए बप्पा का आह्वान करें।
पंचामृत व जल से स्नान: गणेश जी की प्रतिमा को भावपूर्ण स्नान कराएं।
शृंगार करें: बाप्पा को वस्त्र, जनेऊ, चंदन, रोली, अष्टगंध और अक्षत अर्पित करें।
दूर्वा और मोदक अर्पित करें: गणेश जी को दूर्वा बेहद प्रिय है, इसे बप्पा के चरणों में या मस्तक पर चढ़ाएं। इसके साथ ही लाल गुड़हल का फूल, मोदक और लड्डू का भोग लगाएं।
आरती व क्षमा याचना: धूप-दीप जलाकर गणेश जी की आरती गाएं और पूजा में हुई सभी भी भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें।
10 दिवसीय गणेशोत्सव और विसर्जन समय
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से शुरू होने वाला यह गणेशोत्सव पूरे 10 दिनों तक चलता है और भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी यानी अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है।
1.5 दिन, 3 दिन, 5 दिन या 7 दिन का विसर्जन
कई श्रद्धालु अपनी मन्नत और परंपरा के अनुसार डेढ़ दिन, 3 दिन, 5वें दिन या 7वें दिन भी बप्पा का विसर्जन करते हैं।
अनंत चतुर्दशी
इस साल 10 दिवसीय गणेश उत्सव का समापन दिन गुरुवार, 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर होगा। इस दिन साधक ढोल-नगाड़ों और 'गणपति बाप्पा मोरया के जयकारों के साथ भगवान गणेश की नम आंखों के साथ विदाई करते हैं।