
July Hindu Festival Calendar 2026: हिंदू कैलेंडर के मुताबिक, हर तिथि, हर महीना और हर वर्ष अपने आप में खास है और विशेष महत्व रखता है। अब हम जून माह के अंत पर आ गए हैं और जुलाई की ओर बढ़ने वाले हैं। वैदिक पंचांग के मुताबिक, जुलाई का महीना अत्यंत खास होने वाला है और इसकी गुणता बढ़ाने के लिए कई पर्व और त्योहार इस दौरान आएंगे जो धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से शुभ माना जाता है। तो आइए जान लेते हैं कि जुलाई महीने में कौन-कौन से पर्व आएंगे और उनसे संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें।
10 जुलाई - योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi)
हर साल कुल 24 एकादशी आती हैं लेकिन अधिकमास होने के कारण इस साल 26 एकादशी तिथि पड़ रही हैं। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं। यगिनी एकादशी की तिथि 10 जुलाई की सुबह 8 बजकर 16 मिनट से प्रारंभ होकर 11 जुलाई की सुबह 5 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगी। व्रत के पारण का समय 11 जुलाई की दोपहर 1 बजकर 49 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 35 मिनट तक रहने वाला है। ऐसे में 10 और 11 जुलाई दोनों ही दिनों पर योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
16 जुलाई - जगन्नाथ यात्रा (Jagannath Yatra)
भगवान जगन्नाथ को विश्व का नाथ कहा जाता है जो कि भगवान श्रीकृष्ण के ही अवतार माने जाते हैं। उड़ीसा में विराजित भगवान जगन्नाथ की हर वर्ष रथ यात्रा निकलती है जो कि वार्षिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। आषाढ़ माह शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से ये यात्रा शुरू होती है और नौ दिनों तक यह उत्सव मनाया जाता है जिसमें लाखों श्रद्धालु रथ पर विराजमान भगवान जगन्नाथ, भाई बालभद्र और बहन सुभद्रा की मूर्ति स्थापित होती है।
16 जुलाई - कर्क संक्रांति (Kark Sankranti)
ज्योतिषशास्त्र में सूर्य को पिता, आत्मा, मान-सम्मान और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है। 16 जुलाई को सूर्य कर्क राशि में जाएंगे। मान्यता है कि जब सूर्य कर्क राशि में जाते हैं तब व्यक्ति भावुक हो जाता है, आय के स्रोत बढ़ जाते हैं और कारोबार में विस्तार देखने को मिलता है। इस दिन संसार के पिता सूर्यदेव की उपासना करने का विशेष प्रावधान होता है।
25 जुलाई - देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi)
आषाढ़ माह शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं। शास्त्रों के मुताबिक, इस एकादशी के बाद चातुर्मास का आरंभ होता है, जिसमें भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीर सागर में विश्राम के लिए चले जाते हैं। इस दौरान भगवान शिव संसार का संचालन करते हैं। चातुर्मास के दौरान किसी भी शुभ कार्य को करना वर्जित होता है।
29 जुलाई - गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima)
आषाढ़ माह में आने वाली पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई की शाम 6 बजकर 18 मिनट से प्रारंभ होगी और इसका समापन 29 जुलाई की शाम 8 बजकर 5 मिनट पर होगा। ऐसे में 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा मनाई जाएगी। गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसी तिथि पर महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था।
30 जुलाई - श्रावण माह का आरंभ (Shravan Month)
श्रावण माह का हिंदू कैलेंडर में विशेष महत्व है, सावन का अर्थ है बारिश। ये पूरा समय भगवान शिव और माता पार्वती का आराधना के लिए समर्पित होता है। इस मान्यता के पीछे कई लोककथाएं हैं जिसमें कुछ समुद्र मंथन से संबंधित है तो कुछ माता पार्वती और भगवान शिव के विवाह से जुड़ी।
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