
कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि माताओं के लिए सबसे बड़े और पवित्र व्रतों में से एक मानी जाती है। इस पावन पर्व को अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami 2026) कहा जाता है। करवा चौथ के ठीक चार दिन बाद आने वाले इस व्रत में माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस साल 2026 में अहोई अष्टमी का व्रत कब रखा जाएगा? आइए पंचांग के अनुसार सही तिथि, पूजा के नियम और इसकी पौराणिक कथा जानते हैं।
वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 नवंबर 2026, रविवार को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन 2 नवंबर 2026 को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर होगा। ऐसे में अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा। इसी दिन शाम के समय तारों के दर्शन होंगे, जिसके दर्शन के बाद माताएं व्रत खोलेंगी।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय एक साहूकार के सात बेटे और एक बेटी थी। दीपावली से पहले सातों भाई और उनकी पत्नी मिलकर घर की लीपापोती के लिए जंगल से मिट्टी खोद रहे थे। साहूकार की बेटी भी साथ गई थी। मिट्टी खोदते समय गलती से लड़की की खुरपी से साही यानी एक जंगली जानवर के बच्चे को चोट लग गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह देखकर साही बेहद क्रोधित हो गई और उसने शाप दिया कि जैसे तूने मेरी गोद सूनी की है, वैसे ही मैं भी तेरी कोख सूनी कर दूंगी। भयभीत साहूकार की बेटी ने अपनी गलती के लिए साही से क्षमा मांगी। साही ने कहा कि अगर तुम अहोई माता की शरण में जाओ और विधि-विधान से व्रत रखकर माता से क्षमा मांगो, तभी तुम्हारा कल्याण हो सकता है।
लड़की ने साही के बताए अनुसार कार्तिक महीने की अष्टमी को व्रत रखा और अहोई माता की पूजा की। साथ ही अपनी भूल की क्षमा मांगी। उसकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर माता ने उसे क्षमा कर दिया और आशीर्वाद दिया कि तुम्हारी संतान हमेशा सुरक्षित रहेगी। तभी से माताएं अपनी संतानों की रक्षा के लिए यह व्रत रखती चली आ रही हैं।
Connect with India's best astrologers




