
भाद्रपद अमावस्या का हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है। यह पितरों को समर्पित है। इस दौरान पूजा-पाठ और मंत्र जप करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में सुख-शांति आती है। इस साल भाद्रपद की अमावस्या (Bhadrapada Amavasya 2026) कब मनाई जाएगी? आइए इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद अमावस्या तिथि की शुरुआत 10 सितंबर को दिन गुरुवार को सुबह 10 बजकर 33 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 11 सितंबर को सुबह 8 बजकर 56 मिनट पर होगा। उदयातिथि को देखते हुए भाद्रपद की दर्श अमावस्या 10 सितंबर को मनाई जाएगी।
अमावस्या के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। अगर ऐसा करना मुश्किल है, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और व्रत या दान का संकल्प लें।
स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
दोपहर के समय दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके हाथ में काले तिल, कुश और जल लेकर पितरों का तर्पण करें।
उनके नाम से पिंड दान या अन्न दान निकालें।
शाम के समय पीपल के पेड़ के पास जल अर्पित करें और सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें। पीपल की सात बार परिक्रमा करें।
पूजा के बाद ब्राह्मणों और भूखों को भोजन कराएं। साथ ही तिल, वस्त्र, अनाज और जूते-चप्पल का दान करें। इसके अलावा कौवे, कुत्ते और गाय को भी भोजन का हिस्सा जरूर दें।
ॐ सूर्याय नमः॥
ॐ पितृभ्यः नमः॥
ॐ घृणिः सूर्याय नमः॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः॥
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