
कजरी तीज व्रत का सनातन धर्म में बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है। यह हर साल भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इसे बड़ी तीज, कजली तीज या सातुड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का प्रतीक है। आमतौर पर कजरी तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और अखंड सौभाग्य के लिए रखती हैं। हालांकि, अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या कुंवारी कन्याएं (Kajari Teej 2026 for Unmarried Girls) भी कजरी तीज का व्रत रख सकती हैं? आइए जानते हैं कि शास्त्रों के अनुसार कुंवारी कन्याओं के लिए इस व्रत का क्या विधान है और इसके क्या नियम हैं?
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 30 अगस्त 2026 को सुबह 09 बजकर 36 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन 31 अगस्त 2026 को सुबह 08 बजकर 50 मिनट पर होगा। पंचांग को देखते हुए कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त, दिन सोमवार को रखा जाएगा।
1. हे गौरी शंकरार्धांगी ।
यथा त्वं शंकर प्रिया ।
तथा मां कुरु कल्याणी, कान्त कान्तां सुदुर्लभाम् ॥
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