
Kalashtami 2026: पंचांग मुताबिक, प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी आती है। ये दिन बाबा कालभैरव को समर्पित होता है। बता दें कि कालभैरव भगवान शिव के क्रोध से ही उत्पन्न हुए हैं। बाबा कालभैरव कुत्ते की सवारी करते हैं। ऐसे में हम आपको बताते हैं कि वैशाख माह में कालाष्टमी कब मनाई जाएगी। साथ ही हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताएंगे जिन्हें अपनाने से आपके जीवन की समस्त परेशानियां नष्ट हो जाएंगी।
इस साल वैशाख माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 9 अप्रैल की रात्रि 9 बजकर 19 मिनट पर प्रारंभ होगी और इसका समापन 10 अप्रैल की रात्रि 11 बजकर 15 मिनट पर होगा। ऐसे में 10 अप्रैल को कालाष्टमी का पूजन किया जाएगा। इस दिन भगवान शिव के कालभैरव स्वरूप को प्रसन्न करने के लिए इन मुहूर्तों में पूजन किया जा सकता है।
ब्रह्म मुहूर्त 04:31 ए एम से 05:16 ए एम
प्रातः सन्ध्या 04:53 ए एम से 06:01 ए एम
अभिजित मुहूर्त 11:57 ए एम से 12:48 पी एम
विजय मुहूर्त 02:29 पी एम से 03:20 पी एम
गोधूलि मुहूर्त 06:42 पी एम से 07:05 पी एम
सायाह्न सन्ध्या 06:43 पी एम से 07:51 पी एम
अमृत काल 06:08 ए एम से 07:54 ए एम
निशिता मुहूर्त 11:59 पी एम से 12:44 ए एम, अप्रैल 11
सरसों के तेल का दीपक जलाएं
कालाष्टमी के दिन आपको सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए और कालभैरव बाबा की प्रतिमा या तस्वीर के आगे रखना चाहिए। दीपक प्रज्ज्वलित करते समय ऊँ कालभैरवाय नम: मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से बाबा तो प्रसन्न होते ही हैं लेकिन नकारात्मक ऊर्जाओं का भी घर से निकास होता है।
कुत्ते को भोजन देना
कालभैरव बाबा कुत्ते की सवारी करते हैं इसलिए उनका स्नेह और लगाव कुत्तों के प्रति अधिक है। कालाष्टमी के दिन आप कुत्ते को भोजन करा सकते हैं। ऐसा करने से सभी प्रकार के दुखों का निवारण होता है।
उड़द की दाल से उपाय
सनातन धर्म में उड़द की दाल को बाबा कालभैरव और शनिदेव दोनों से संबंधित माना जाता है। कालाष्टमी के दिन यदि आप काले रंग के कपड़े में उड़द की दाल को बांधकर भैरव बाबा के समक्ष अर्पित करें या जरूरतमंद को दान करें, तो करियर और आर्थिक स्थिति की तंगी दूर होती है।
भैरव चालीसा का पाठ
कालाष्टमी के दिन भैरव चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है। ऐसा करने से शत्रुओं का नाश होता है, संकटों का निवारण होता है और भय का नाश होता है। भैरव चालीसा का पाठ करने के लिए सबसे अच्छा समय रात का है। कालाष्टमी के दिन 21 बार कालभैरव चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
कालभैरव कवच
ॐ सहस्त्रारे महाचक्रेकर्पूरधवले गुरुः।
पातु मां बटुको देवोभैरवः सर्वकर्मसु॥
पूर्वस्यामसिताङ्गो मांदिशि रक्षतु सर्वदा।
आग्नेयां च रुरुः पातुदक्षिणे चण्ड भैरवः॥
नैॠत्यां क्रोधनः पातुउन्मत्तः पातु पश्चिमे।
वायव्यां मां कपाली चनित्यं पायात् सुरेश्वरः॥
भीषणो भैरवः पातुउत्तरास्यां तु सर्वदा।
संहार भैरवःपायादीशान्यां च महेश्वरः॥
ऊर्ध्वं पातु विधाता चपाताले नन्दको विभुः।
सद्योजातस्तु मां पायात्सर्वतो देवसेवितः॥
रामदेवो वनान्ते चवने घोरस्तथावतु।
जले तत्पुरुषः पातुस्थले ईशान एव च॥
डाकिनी पुत्रकः पातुपुत्रान् में सर्वतः प्रभुः।
हाकिनी पुत्रकः पातुदारास्तु लाकिनी सुतः॥
पातु शाकिनिका पुत्रःसैन्यं वै कालभैरवः।
मालिनी पुत्रकः पातुपशूनश्वान् गजास्तथा॥
महाकालोऽवतु क्षेत्रंश्रियं मे सर्वतो गिरा।
वाद्यं वाद्यप्रियः पातुभैरवो नित्यसम्पदा॥
॥ इति तान्त्रोक्त भैरव कवचं सम्पूर्णम् ॥
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