Pitru Paksha 2026: आज प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध और तर्पण कैसे करें? आइए तर्पण की विधि,श्राद्ध में कुतुप मुहूर्त का महत्व जानते हैं।
भाद्रपद पूर्णिमा के बाद आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से पितृ पक्ष के मुख्य श्राद्ध तिथियों की शुरुआत हो जाती है। आज प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध है। सनातन धर्म में इस दिन का बहुत ही खास महत्व है। ऐसी मान्यता है कि प्रतिपदा तिथि पर उन पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और पिंड दान किया जाता है, जिनकी मृत्यु किसी भी महीने की प्रतिपदा तिथि को हुई हो। इसके अलावा नाना-नानी के श्राद्ध के लिए भी यह तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। आइए जानते हैं कि प्रतिपदा श्राद्ध पर तर्पण करने की सही विधि क्या है, श्राद्ध पूजा में कुतुप कालका क्या महत्व है और इस दिन किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए?
क्यों होता है कुतुप काल श्राद्ध के लिए सबसे खास?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिन के 15 मुहूर्तों में से आठवां मुहूर्त 'कुतुप काल' कहलाता है। यह समय दोपहर में लगभग 11:30 बजे से 12:30 बजे के बीच का होता है। श्राद्ध कर्म कभी भी सुबह-सुबह या सूर्यास्त के बाद नहीं करना चाहिए। दोपहर का समय ही पितरों की पूजा के लिए सबसे अच्छा माना गया है और उसमें भी कुतुप काल को सर्वश्रेष्ठ कहा गया है। ऐसी मान्यता है कि इस समय किया गया तर्पण सीधे पितरों तक पहुंचता है। इसके साथ ही कुतुप काल में किया गया तर्पण पूर्वजों की आत्मा को तृप्त करता है और घर में सुख-समृद्धि लाता है।
प्रतिपदा श्राद्ध पर तर्पण की विधि
सही दिशा: स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहनें। तर्पण हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके किया जाता है।
कुशा की अंगूठी: अपनी अनामिका उंगली में कुशा की अंगूठी धारण करें। कुशा के बिना जल अर्पित करने से फल अधूरा रहता है।
तर्पण की सामग्री: एक तांबे या पीतल के लोटे में जल भरें। उसमें थोड़ा सा गंगाजल, कच्चा दूध, काले तिल और सफेद फूल मिलाएं।
अंगूठे के रास्ते जल दें: दोनों हाथों की हथेली में जल भरकर अपने अंगूठे के रास्ते जल को किसी पात्र या जमीन पर धीरे-धीरे गिराएं। जल गिराते समय अपने पूर्वजों का ध्यान करें और उनसे सुख-शांति का आशीर्वाद मांगें।
पंचबलि भोग: तर्पण के बाद घर में बने सात्विक भोजन में से 5 हिस्से गाय, कुत्ते, कौवे, देव और चींटियों के लिए जरूर निकालें। इसके बाद ही किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को आदर के साथ भोजन कराएं।
प्रतिपदा श्राद्ध पर ध्यान रखने योग्य जरूरी बातें
इस दौरान ज्यादा से ज्यादा दान-पुण्य करें।
पूजा और तर्पण में केवल काले तिल का उपयोग करें, सफेद तिल पितृ कर्म में वर्जित माने जाते हैं।
इस दिन घर में पूरी तरह सात्विक माहौल रखें। लहसुन, प्याज या तामसिक चीजों का प्रयोग भोजन में न करें।
श्राद्ध के दिन मन शांत रखें। किसी से बहस न करें और घर के द्वार पर आए किसी भी व्यक्ति या जीव-जंतु को खाली हाथ न लौटाएं।