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Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन पर भद्रा का साया है या नहीं? नोट करें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

Kumari Nisha ThapaKumari Nisha ThapaUpdated 25 Aug 2026 11:51 AM IST
Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन पर भद्रा का साया है या नहीं? नोट करें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

Special Things

इस साल भी रक्षा बंधन पर भद्रा का साया रहेगा या नहीं? आइए यहां सभी महत्वपूर्ण बातों को जानते हैं। 
भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक रक्षा बंधन का पर्व हर साल सावन महीने की पूर्णिमा तिथि को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल यह पावन पर्व दिन शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र यानी राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सफलता की कामना करती हैं, वहीं भाई अपनी बहनों को रक्षा का वचन देते हैं। शास्त्रों के अनुसार, रक्षा बंधन के दिन भद्रा काल और राहुकाल का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि भद्रा काल और राहुकाल में राखी बांधना वर्जित होता है, तो आइए यहां भद्रा काल, राहुकाल और राखी बांधने का शुभ समय जानते हैं। 

रक्षा बंधन पर भद्रा का साया रहेगा या नहीं?

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल 27 अगस्त को ही भद्रा काल समाप्त हो जाएगा। भद्रा का साया 27 अगस्त को सुबह 09 बजकर 08 मिनट से रात 09 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इस साल 28 अगस्त, शुक्रवार के दिन रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषी गणना के आधार पर  इस साल भद्रा काल सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगा। यानी राखी बांधने के लिए इस बार भद्रा काल का सामना नहीं करना पड़ेगा।

राखी बांधने का समय

राखी बांधने का शुभ समय 28 अगस्त की सुबह 06 बजकर 23 मिनट से सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक का है। 

शुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 14 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 5  मिनट तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 6 बजकर 57 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 19 मिनट तक।

राहुकाल समय

 रक्षा बंधन के दिन राहुकाल दोपहर 10 बजकर 30 मिनट से 12 बजे तक रहेगा।

रक्षा बंधन का धार्मिक महत्व

रक्षा सूत्र केवल एक धागा नहीं बल्कि सुरक्षा का एक पवित्र कवच है, जिसका वर्णन पौराणिक कथाओं में भी मिलता है कि जब देवताओं और असुरों के बीच युद्ध चल रहा था, तब इंद्राणी ने देवराज इंद्र की विजय के लिए उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था। इसके अलावा महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण की उंगली कट जाने पर देवी द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनकी उंगली पर बांधा था, जिसके बदले श्रीकृष्ण ने चीरहरण के समय द्रौपदी की रक्षा की थी।

शास्त्रों में कहा गया है कि भद्रा में रक्षा सूत्र बांधने से राजा रावण का सर्वनाश हुआ था, इसलिए भद्रा काल से पूरी तरह बचना चाहिए और शुभ मुहूर्त में ही राखी बांधनी चाहिए। रक्षा बंधन के दिन धार्मिक विधि-विधान से राखी बांधने पर भाई-बहन दोनों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

राखी बांधने की सही विधि 

  • पूजा की थाली तैयार करें: तांबे या पीतल की थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई, धूप और राखी रखें।
  • दिशा का ध्यान रखें: राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। बहन का मुख पश्चिम दिशा की तरफ रहे।
  • सिर ढके: भाई और बहन दोनों को अपने सिर पर कपड़ा रखना चाहिए। 
  • तिलक लगाएं: सबसे पहले भाई के माथे पर रोली और चंदन का तिलक लगाएं, फिर तिलक पर अक्षत लगाएं।
  • आरती उतारें: तिलक लगाने के बाद भाई की नजर उतारने के लिए दीपक से आरती करें।
  • दाहिने हाथ में राखी बांधें: भाई की दाहिनी कलाई पर 'येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबलः।तेन त्वामपि बध्नामि, रक्षे मा चल मा चल॥' मंत्र का जाप करते हुए राखी बांधें।
  • मुंह मीठा कराएं: राखी बांधने के बाद भाई को मिठाई खिलाएं और बड़े भाई-बहनों का आशीर्वाद लें।
  • उपहार: अंत में भाई अपनी बहन को रक्षा का वचन देते हुए उपहार दे।

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