पितृ पक्ष की अमावस्या तिथि को सर्वपितृ अमावस्या (Sarva Pitru Amavasya 2026) कहा जाता है, जो पूर्वजों को विदा करने का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। आइए यहां इस तिथि से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।
पितृ पक्ष का अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या या महालया अमावस्या के नाम से जाना जाता है। सनातन धर्म में इस तिथि का बहुत बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह दिन उन सभी पितरों के श्राद्ध, तर्पण और दान करने के लिए समर्पित है, जिनकी मृत्यु की सही तिथि हमें पता नहीं होती या जिनका श्राद्ध हम पितृ पक्ष के दौरान किसी वजह से नहीं कर पाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन (Sarva Pitru Amavasya 2026) विधि-विधान से किया गया तर्पण सीधे पूर्वजों तक पहुंचता है और वे प्रसन्न होकर अपने वंश को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देकर देवलोक लौटते हैं। आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।
सर्वपितृ अमावस्या पर तर्पण के नियम
अमावस्या की सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
स्नान के बाद सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनें।
तर्पण का काम हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके किया जाता है,क्योंकि यह पितरों की दिशा मानी गई है।
हाथ की अनामिका उंगली में कुशा पहनें। एक तांबे या पीतल के पात्र में शुद्ध जल, गंगाजल, कच्चा दूध, अक्षत और काले तिल मिला लें।
दोनों हाथों से जल भरकर अंगूठे के माध्यम से जल को धीरे-धीरे पात्र में छोड़ें। ऐसा करते समय अपने पूर्वजों का ध्यान करें और उनसे कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करें।
तर्पण करते समय ध्यान रखें ये खास नियम
कुतुप मुहूर्त में ही करें श्राद्ध: तर्पण और श्राद्ध का कर्म दोपहर के समय ही किया जाना चाहिए, क्योंकि कुतुप काल को तर्पण के लिए सबसे शुभ माना गया है। सुबह या फिर सूर्यास्त के बाद तर्पण न करें।
पंचबलि भोग निकालना न भूलें: तर्पण के बाद तैयार सात्विक भोजन में से गाय, कुत्ता, कौआ, देव और चींटी के लिए भोजन का हिस्सा जरूर निकालें।
काले तिल का ही प्रयोग करें: पितृ पूजन में केवल काले तिल का प्रयोग ही करें। गलती से भी सफेद तिल का उपयोग तर्पण में न करें।
लोहे या प्लास्टिक के बर्तन वर्जित: तर्पण या श्राद्ध के भोजन में लोहे, प्लास्टिक या स्टील के बर्तनों का प्रयोग करने से बचें। तांबे, पीतल या चांदी के बर्तन ही अच्छे माने गए हैं।
सर्वपितृ अमावस्या पर क्या दान करें?
काले तिल, कुशा और नए वस्त्र का दान करें।
गेहूं, चावल, दाल और गुड़ का दान महादान माना जाता है।
पितरों की शांति के लिए किसी जरूरतमंद व्यक्ति को जूते-चप्पल और छाते का दान करना शुभ फल देता है।