
हिंदू पंचांग में सावन पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इसी तिथि पर सावन माह का समापन होता है और इसी दिन रक्षाबंधन का पावन पर्व भी मनाया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल सावन पूर्णिमा 28 अगस्त 2026, दिन शुक्रवार यानी आज के दिन मनाई जा रही है। ऐसे में आइए इस दिन इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।
सावन पूर्णिमा को भगवान शिव, भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान, जप और तप करने से अक्षय पुण्य फल की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से सुख-समृद्धि और पारिवारिक खुशहाली आती है। इसे श्रावणी उपाकर्म और नारियल पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें पीले फूल, अक्षत, चंदन अर्पित करें।
भगवान विष्णु को तुलसी दल के साथ भोग लगाएं और घी का दीपक जलाएं।
इसके बाद सत्यनारायण भगवान की कथा सुनें या पढ़ें। शाम के समय प्रदोष काल में चंद्र देव को अर्घ्य दें।
चंद्रमा को दूध, जल और अक्षत मिलाकर अर्घ्य देने से चंद्र दोष दूर होता है।
सावन पूर्णिमा पर दान का महत्व सबसे ज्यादा है। इस दिन अन्न, वस्त्र, तिल, घी और धन का दान करने से कई यज्ञों के बराबर पुण्य फल मिलता है। अगर आप गंगा स्नान के लिए नहीं जा सकते हैं, तो घर पर ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें और जरूरतमंदों को भोजन कराएं। इस बार पूर्णिमा पर सुकर्मा योग और पंचक भी है, लेकिन गुरुवार से शुरू होने के कारण पंचक का अशुभ प्रभाव नहीं माना जा रहा है।
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