Special Things
शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो चुकी है। यह पर्व मां दुर्गा को समर्पित है। नवरात्र के नौ दिनों में मां जगदंबा की पूर्ण कृपा पाने और घर में सुख-समृद्धि लाने के लिए पूजा के सही नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है। ऐसे में आइए यहां इस पर्व से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।
सनातन धर्म में शारदीय नवरात्रि का त्योहार बहुत ही पवित्र, फलदायी और शुभ माना जाता है। आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाले इस उत्सव में पूरे नौ दिनों तक शक्ति की अधिष्ठात्री देवी मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान मां जगदंबा खुद पृथ्वी लोक पर आती हैं और अपने भक्तों के सभी दुख, कष्ट तथा दरिद्रता को दूर करती हैं। अगर पहले दिन सही शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करके नियमपूर्वक पूजा की जाए, तो घर में सालभर सुख, शांति, आरोग्य और धन-धान्य का वास बना रहता है। ऐसे में आइए इस पर्व से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष विधान है। सही मुहूर्त में स्थापना करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
- 11 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 32 मिनट से 10 बजकर 26 मिनट तक
- दोपहर 12 बजकर 2 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक।
पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, पवित्र वस्त्र पहनें और घर के मंदिर की अच्छे से सफाई करें।
- एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें।
- एक मिट्टी के बड़े पात्र में साफ मिट्टी भरकर उसमें जौ बोएं।
- तांबे या मिट्टी के कलश में शुद्ध जल भरें।
- उसमें थोड़ा सा गंगाजल, सिक्का, सुपारी, अक्षत और दूर्वा डालें।
- कलश के मुख पर आम या अशोक के 5 या 7 पत्ते रखें।
- एक नारियल पर लाल चुनरी या कलावा लपेटकर कलश के ऊपर स्थापित करें।
- मां दुर्गा के समक्ष शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं और नौ दिनों के व्रत व पूजा का संकल्प लें।
- अंत में दुर्गा सप्तशती का पाठ और आरती करें।
- पूजा में हुई गलती के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
मां दुर्गा का प्रिय भोग
मां दुर्गा को शुद्ध देसी घी, गाय का दूध, सफेद मिठाई या मखाने की खीर का भोग अर्पित करें।
पूजा मंत्र
- ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।।
- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।।
पूजा के समय रखें इन बातों का ध्यान
- तामसिक चीजों से पूरी तरह परहेज करें और ज्यादा से ज्यादा दान-पुण्य करें।
- इन नौ दिनों में घर में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का प्रयोग बिल्कुल न करें।
- अगर आपने घर में कलश स्थापित किया है या अखंड ज्योति जलाई है, तो घर को कभी भी पूरी तरह बंद करके अकेला न छोड़ें।
- मन में किसी के प्रति बुरा भाव न लाएं। घर में भजन-कीर्तन और मंत्रों का जाप करते रहें।