Navratri Kanya Pujan 2026: शारदीय नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व है। आइए जानते हैं कन्या पूजन में 2, 5, 7 या 9 कितनी कन्याओं को भोजन कराना शुभ माना जाता है और पूजा का सही नियम क्या है?
हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि के पर्व का बहुत ज्यादा महत्व है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा-अर्चना करने के बाद अष्टमी या नवमी तिथि को कन्या पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी कन्याओं को साक्षात मां दुर्गा का रूप माना जाता है। कन्या पूजन के बिना नवरात्रि का व्रत और पूजा अधूरी मानी जाती है, लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि कन्या पूजन में 2, 5, 7 या 9 में से कितनी कन्याओं को भोजन कराना सबसे शुभ होता है? आइए जानते हैं शास्त्रों के अनुसार कन्याओं की सही संख्या और पूजन के जरूरी नियम क्या हैं?
कितनी कन्याओं को भोजन कराना होता है सही?
हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, कन्या पूजन में 9 कन्याओं को भोजन कराना सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि 9 कन्याएं मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों का प्रतिनिधित्व करती हैं। हालांकि, अगर आपको किसी वजह से 9 कन्याएं न मिल पाएं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप अपनी सुविधा अनुसार 2, 3, 5, 7 या 9 कन्याओं को भी बुलाकर भोजन करा सकते हैं। शास्त्रों में विषम संख्या में कन्याओं को बुलाना शुभ माना गया है।
कन्याओं की संख्या का धार्मिक महत्व
शास्त्रों में अलग-अलग संख्या में कन्याओं के पूजन का अलग-अलग फल बताया गया है -
2 कन्याएं: इनकी पूजा करने से दुख और दरिद्रता दूर होती है।
3 कन्याएं: 3 कन्याओं के पूजन से घर में धन-धान्य और समृद्धि आती है।
5 कन्याएं: इनकी पूजा से विद्या, बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
7 कन्याएं: 7 कन्याओं की पूजा से पद, प्रतिष्ठा और मान-सम्मान बढ़ता है।
9 कन्याएं: 9 कन्याओं का पूजन करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और मां दुर्गा का पूर्ण आशीर्वाद मिलता है।
लंगूर का होना क्यों है जरूरी?
कन्या पूजन के दौरान कन्याओं के साथ कम से कम एक छोटे बालक को भी जरूर आमंत्रित किया जाता है। इस बालक को लंगूर या बटुक भैरव का रूप माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव ने मां दुर्गा की रक्षा के लिए भैरव बाबा को उनके साथ रहने को बोला था, इसलिए भैरव बाबा के पूजन के बिना कन्या पूजन का पूरा फल नहीं मिलता है।
कन्या पूजन विधि
उम्र का ध्यान रखें: कन्या पूजन के लिए 2 साल से लेकर 10 साल तक की कन्याओं को आमंत्रित करना चाहिए।
आदर से स्वागत करें: जब कन्याएं घर आएं, तो सबसे पहले उनके पैर साफ पानी या दूध से धोएं और साफ कपड़े से पोंछें।
तिलक और रोली: सभी कन्याओं और बालक के माथे पर कुमकुम, रोली का तिलक लगाएं और अक्षत लगाएं।
सात्विक भोग: कन्याओं को पूरी, चने की सब्जी और हलवा या खीर का भोग श्रद्धापूर्वक परोसें।
दक्षिणा और उपहार: भोजन कराने के बाद कन्याओं को अपनी क्षमता के अनुसार दक्षिणा, लाल चुनरी, फल या पढ़ाई का सामान उपहार में दें।
आशीर्वाद लें: अंत में सभी कन्याओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें और उन्हें आदर के साथ विदा करें।