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Varuthini Ekadashi 2026: इस कथा के बिना अधूरा है वरूथिनी एकादशी का व्रत, यहां पढ़ें

शालू मिश्राशालू मिश्राUpdated 06 Apr 2026 01:52 PM IST
Varuthini Ekadashi 2026: इस कथा के बिना अधूरा है वरूथिनी एकादशी का व्रत, यहां पढ़ें

Special Things

Varuthini Ekadashi 2026: इस साल वरूथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा। यदि आप भी श्रीहरि की कृपा पाना चाहते हैं तो वरूथिनी एकादशी पर इस कथा का पाठ जरूर करें। 

Varuthini Ekadashi 2026: हर साल वैशाख माह कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को वरूथिनी एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन विधिवत व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं, सौभाग्य प्राप्त होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

कब है वरूथिनी एकादशी? 


इस साल वैशाख मास कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि 13 अप्रैल की रात्रि 1 बजकर 16 मिनट से प्रारंभ होगी और इसका समापन 14 अप्रैल की रात्रि 1 बजकर 8 मिनट पर होगा। ऐसे में 13 अप्रैल को एकादशी का व्रत रखा जाएगा और 14 अप्रैल को व्रत का पारण किया जाएगा।   पारण का समय सुबह 6 बजकर 54 मिनट से लेकर 8 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। यदि आप भी श्रीहरि को प्रसन्न करना चाहते हैं और उनके शरण में जाना चाहते हैं तो आपको वरूथिनी एकादशी पर व्रत के साथ-साथ इस कथा का पाठ या श्रवण जरूर करना चाहिए। आइए जानते हैं कि ये कथा कौन सी है। 



वरूथिनी एकादशी व्रत कथा 


भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को बताते हैं कि वैशाख महीने की कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को वरूथिनी एकादशी कहते हैं और इसकी व्रत कथा इस प्रकार है। 

एक समय की बात है, नर्मदा नदी के तट के किनारे एक राजा राज्य किया करता था और उसका नाम था मान्धाता। वह पराक्रमी होने के साथ-साथ अत्यंत दानशील और तपस्वी थे। एक दिन वह अन्य दिनों की तरह ही तपस्या करने के लिए वन में चले गए। उसी वन में अचानक से जंगली भालू आया और तपस्या में लीन राजा के पैर को चबाने लगाना किंतु राजा इतने लीन थे कि उन्हें तनिक से भनक भी नहीं लगी। कुछ देर बाद पैरों को चबाते-चबाते भालू राजा को घसीटकर आगे तक लेकर चला गया। जब राजा को होश आया तो वह घबरा उठा किंतु वह तपस्वी धर्म के कारण भालू पर क्रोध या हिंसा ना करने के लिए प्रतिबद्ध था। 

भय और दर्द से आतुर होकर राजा ने भगवान विष्णु को मदद के लिए पुकारा। उसी क्षण श्रीहरि प्रकट हुए और चक्र से भालू को मार डाला। लेकिन भालू राजा के पैर को पूरी तरह से खा चुका था जिसके कारण वह बहुत व्याकुल था। तब श्रीहरि ने राजा को सुझाव दिया कि तुम मथुरा जाओ और विधिवत वरूथिनी एकादशी का व्रत करो जिससे तुम्हारी कामना पूरी हो सके। राजा ने ठीक वैसा ही किया और शीघ्र ही उसके शरीर के अंग वापिस लौट आए और वह पहले की भांति सुदर मनोहर रूप वाला हो गया। मान्यता है कि जो व्यक्ति विधिवत श्रीहरि के लिए व्रत करता है वह उसे दर्शन जरूर देते हैं।  

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