
Vat Savitri 2026: हिंदू धर्म में कई ऐसी खास तिथियां हैं जिसमें विवाहित स्त्री अपने पति के लिए उपवास रखती हैं और उनकी दीर्घायु के लिए कामना करती हैं और इन्हीं में से एक है वट सावित्री व्रत।
वट यानी बर्गद का पेड़ जिसे राष्ट्रीय वृक्ष का दर्जा दिया गया है। वट सावित्री व्रत हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को आती है जो सावित्री और सत्यवान के जोड़े पर आधारित है कि किस प्रकार पत्नी का प्रेम और उसकी निष्ठा प्रति के प्राण की रक्षा करती है। ऐसे में जान लेते हैं कि इस साल वट सावित्री का व्रत कब रखा जाएगा और इस दिन पूजन के लिए कौन-कौन से शुभ संयोग बनेंगे। इस साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि 16 मई की सुबह 5 बजकर 11 मिनट से लेकर प्रारंभ होगी और इसका समापन 17 मई की रात्रि 1 बजकर 30 मिनट पर होगा। ऐसे में 16 मई को वट सावित्री के व्रत का पालन किया जाएगा।
ब्रह्म मुहूर्त 04:06 ए एम से 04:48 ए एम
प्रातः सन्ध्या 04:27 ए एम से 05:30 ए एम
अभिजित मुहूर्त 11:50 ए एम से 12:44 पी एम
विजय मुहूर्त 02:33 पी एम से 03:27 पी एम
गोधूलि मुहूर्त 07:04 पी एम से 07:24 पी एम
सायाह्न सन्ध्या 07:05 पी एम से 08:07 पी एम
अमृत काल 01:15 पी एम से 02:40 पी एम
निशिता मुहूर्त 11:56 पी एम से 12:38 ए एम, मई 17
आपको बता दें कि वट सावित्री पर बर्गद के वृक्ष का पूजन किया जाता है और इसके पीछे का कारण है कि बर्गद का वृक्ष दीर्घायु, स्थायित्व और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस व्रत के पीछे सावित्री और सत्यवान की कथा जुड़ी हुई है जो पतिव्रता नारी की अद्भुत शक्ति को दर्शाती है। सावित्री ने सत्यवान को पति रूप में चुना, जबकि उन्हें पता था कि उसकी आयु कम है। विवाह के एक साल बाद एक दिन जंगल में सत्यवान की मृत्यु हो गई। यमराज उसके प्राण लेने आए, तब सावित्री उनके पीछे-पीछे चल पड़ी। अपनी बुद्धि, धैर्य और भक्ति से उसने यमराज को प्रसन्न कर लिया। तब यमराज ने कहा कि मैं तुम्हें सत्यवान नहीं लौटा सकता लेकिन तुम्हारी कोई एक मनोकामना पूरी कर सकता हूं। तब सावित्री कहती हैं कि मुझे वरदान के रूप संतान चाहिए जो कि सत्यवान के जीवित होने के अलावा संभव नहीं था। अंत में यमराज ने सत्यवान को पुनः जीवन दे दिया। इस प्रकार सावित्री ने अपने प्रेम और दृढ़ निश्चय से अपने पति को मृत्यु से बचा लिया। तभी से विवाहित स्त्रियां अपने दांपत्य जीवन की रक्षा और पति की दीर्घायु के लिए उपवास करती हैं।
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