
Vivah Panchami: सनातन धर्म में देवी-देवताओं को समर्पित निम्न तिथियां होती हैं जिनकी महत्ता विशेष होती है। इसी प्रकार मार्गशीर्ष मास शुक्ल पक्ष में पंचमी तिथि पर विवाह पंचमी का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन त्रेता युग में भगवान विष्णु के सातवें अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम का विवाह माता लक्ष्मी स्वरूप माता सीता से हुआ था। सनातन धर्म में प्रभु श्रीराम और माता सीता के रिश्ते को श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि उनके रिश्ते में प्रेम के अलावा त्याग, आदर और आत्मसमर्पण भी था।
पंचांग के अनुसार, पंचमी तिथि 24 नवंबर की रात 9 बजकर 22 मिनट से प्रारंभ होकर 25 नवंबर की रात 10 बजकर 56 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के मुताबिक, 25 नवंबर को विवाह पंचमी का त्योहार मनाया जाएगा। इस दिन भगवान राम और माता सीता की विधिवत पूजा करने का विशेष प्रावधान होता है जिसके द्वारा आपको ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त हो सके। इस दिन कई शुभ संयोग बनने जा रहे हैं जिसकी जानकारी हम आपको इस आलेख में दे रहे हैं।
विवाह पंचमी के विशेष अवसर पर कई शुभ संयोग हैं जिसमें आप प्रभु श्रीराम और माता जानकी की आराधना कर सकते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 5 बजकर 4 मिनट से लेकर सुबह 5 बजकर 58 मिनट तक।
अभिजित मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक।
गोधूलि मुहूर्त- शाम 5 बजकर 22 मिनट से लेकर 5 बजकर 49 मिनट तक।
अमृतकाल मुहूर्त- शाम 5 बजे से प्रारंभ होकर 6 बजकर 45 मिनट तक।
विजय मुहूर्त- दोपहर 1 बजकर 53 मिनट से दोपहर 2 बजकर 36 मिनट तक।

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