9 Avatars of Durga: यूं तो आज से चैत्र नवरात्रि प्रारंभ हो चुकी है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दौरान मां के किन नौ स्वरूपों की उपासना की जाती है और उनके प्रिय भोग, मंत्र और महत्व क्या हैं।
9 Avatars of Durga: हर साल चैत्र मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि प्रारंभ होती है और रामनवमी पर समाप्त होती है। इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से प्रारंभ होकर 26 मार्च तक रहेगी। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को पूजा जाता है। तो चलिए हम आपको बताते हैं कि माता के नौ स्वरूप कौन से हैं, उनका क्या महत्व है, प्रिय भोग और मंत्र क्या है।
माता के नौ स्वरूप, भोग और मंत्र
प्रथम दिन
मां शैलपुत्री की उपासना की जाती है।
माता शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री मानी जाती हैं।
इन्हें शक्ति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
प्रिय भोग - गाय के शुद्ध देसी घी का भोग
मंत्र - ह्रीं शिवायै नम:।
दूसरा दिन
मां ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है।
माता ब्रह्मचारिणी को तप और साधना की देवी कहा गया है।
वह शक्ति और संयम की देवी मानी जाती हैं।
प्रिय भोग - शक्कर का भोग
मंत्र - ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।
तीसरा दिन
मां चंद्रघण्टा की आराधना करने का विशेष प्रावधान होता है।
मां का यह स्वरूप शांति और वीरता की झलक देता है।
इनकी उपासना करने से भय और नकारात्कता का नाश होता है।
प्रिय भोग - दूध से बने पदार्थों का भोग
मंत्र - ऐं श्रीं शक्तयै नम:।
चौथा दिन
चौथे दिन पर माता माता कूष्मांडा की उपासना की जाती है।
माता कूष्मांडा को ब्रह्मांड की रचयिता कहा गया है।
देवी स्वास्थ्य और ऊर्जा प्रदान करती हैं।
प्रिय भोग - मालपुए का भोग
मंत्र - ऐं ह्री देव्यै नम:।
पांचवा दिन
इस दिन स्कंद माता की उपासना करने का नियम है।
देवी भगवान कार्तिकेय की माता हैं।
इन्हें मातृत्व और करुणा का प्रतीक माना गया है।
प्रिय भोग - केले का भोग
मंत्र - ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:।
छठा दिन
छठे दिन माता के कात्यायनी रूप को पूजा जाता है।
मां कात्यायनी को साहस और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
विवाह और प्रेम में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं, तो देवी के इस स्वरूप का चिंतन करें।
प्रिय भोग - शहद का भोग
मंत्र - क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:।
सातवां दिन
इस समय मां कालरात्रि की आराधना की जाती है।
माता कालरात्रि को देवी का सर्वाधिक उग्र रूप माना जाता है।
इन्हें पूजने से भय और गलत विचारों का नाश होता है।
प्रिय भोग - गुड़ का भोग
मंत्र - क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।
आठवां दिन
इस दिन महागौरी मां की उपासना की जाती है।
महागौरी मां को शांति और सौंदर्य का प्रतीक माना गया है।
इनकी आराधना करने से सुख-शांति की अनुभूति होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
प्रिय भोग - नारियल का भोग
मंत्र - श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:।
नौंवा दिन
इस दिन सिद्धिदात्री माता की पूजा की जाती है।
मां सिद्धिदात्री को सिद्धि और ज्ञान देने वाली देवी माना गया है।
इनकी उपासना से सफलता और उपलब्धि हासिल होती है।
प्रिय भोग - तिल का भोग
मंत्र - ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।