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Ashtami Shradh 2026: अष्टमी श्राद्ध की रात घर के इन स्थानों में जलाएं दीपक, पितृ बरसाएंगे अपनी कृपा

Vaishnavi DwivediVaishnavi DwivediUpdated 03 Oct 2026 01:00 PM IST
Ashtami Shradh 2026: अष्टमी श्राद्ध की रात घर के इन स्थानों में जलाएं दीपक, पितृ बरसाएंगे अपनी कृपा

Special Things

पितृ पक्ष की अष्टमी तिथि (Ashtami Shradh 2026) का श्राद्ध पूर्वजों का आशीर्वाद पाने के लिए बहुत खास माना जाता है। अगर आप दिन में दान-पुण्य नहीं कर पाए हैं, तो अष्टमी की रात घर की कुछ खास दिशाओं और जगहों पर दीपक जलाकर भी पितरों की कृपा पा सकते हैं। आइए उन खास उपाय को जानते हैं।

पितृ पक्ष में पड़ने वाली अष्टमी तिथि का श्राद्ध बहुत ही फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो लोग अपने पूर्वजों की मृत्यु की सही तिथि नहीं जानते या किसी वजह से रोजाना तर्पण नहीं कर पाते, वे अष्टमी तिथि पर श्राद्ध और तर्पण करके अपने पितरों का आशीर्वाद पा सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं। अष्टमी श्राद्ध (Ashtami Shradh 2026) की रात घर में सही स्थान पर दीपक जलाने से भी पितृ खुश होते है और तृप्त होकर घर के सभी कष्टों को दूर करते हैं। आइए यहां इस दिन से जुड़े अचूक उपाय को जानते हैं।

अष्टमी श्राद्ध की रात इन स्थानों पर जरूर जलाएं दीपक (Ashtami Shradh 2026 Ke Upay)

दक्षिण दिशा 

दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना जाता है। अष्टमी की रात घर के आंगन में दक्षिण दिशा की ओर लौ करके सरसों के तेल का एक दीपक रखें। इससे पितृ खुश होते हैं और घर से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है।

घर का मुख्य द्वार 

रात के समय घर के मुख्य द्वार के दाहिनी ओर एक दीपक जलाकर रखें। मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है।

रसोई घर 

रसोई में जहां पीने का पानी रखा जाता है, वहां पितरों का वास माना जाता है। ऐसे में अष्टमी की रात इस जगह पर एक दीपक जरूर जलाएं। इससे घर में कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होती है। इसके साथ ही पितृ दोष शांत होता है।

तुलसी का पौधा

तुलसी के पौधे के पास शाम को घी का दीपक जलाएं और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें। ऐसा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ-साथ पितृ देवों की भी कृपा मिलती है।

घर की छत 

अष्टमी की रात घर की छत या बालकनी में दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके एक दीपक रखें। यह दीपक पितरों के लिए मार्गदर्शक ज्योति माना जाता है, जिससे उनकी आत्मा को शांति मिलती है।

दीपक जलाते समय ध्यान रखें ये बातें

  • पितरों के नाम का दीपक जलाते समय सरसों के तेल का ही प्रयोग करें।
  • ध्यान रखें कि दीपक की लौ हमेशा दक्षिण दिशा की तरफ होनी चाहिए।
  • अगर हो पाए तो दीपक के तेल में थोड़ा सा काला तिल डाल दें। काले तिल पितरों को बहुत प्रिय हैं और इससे पितृ दोष का प्रभाव कम होता है।
  •  दीपक जलाते समय हाथ जोड़कर मन ही मन अपने पितरों का ध्यान करें और उनसे परिवार की खुशहाली, आरोग्य और तरक्की की प्रार्थना करें।

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