
पितृ पक्ष में पड़ने वाली अष्टमी तिथि का श्राद्ध बहुत ही फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो लोग अपने पूर्वजों की मृत्यु की सही तिथि नहीं जानते या किसी वजह से रोजाना तर्पण नहीं कर पाते, वे अष्टमी तिथि पर श्राद्ध और तर्पण करके अपने पितरों का आशीर्वाद पा सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं। अष्टमी श्राद्ध (Ashtami Shradh 2026) की रात घर में सही स्थान पर दीपक जलाने से भी पितृ खुश होते है और तृप्त होकर घर के सभी कष्टों को दूर करते हैं। आइए यहां इस दिन से जुड़े अचूक उपाय को जानते हैं।
दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना जाता है। अष्टमी की रात घर के आंगन में दक्षिण दिशा की ओर लौ करके सरसों के तेल का एक दीपक रखें। इससे पितृ खुश होते हैं और घर से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है।
रात के समय घर के मुख्य द्वार के दाहिनी ओर एक दीपक जलाकर रखें। मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
रसोई में जहां पीने का पानी रखा जाता है, वहां पितरों का वास माना जाता है। ऐसे में अष्टमी की रात इस जगह पर एक दीपक जरूर जलाएं। इससे घर में कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होती है। इसके साथ ही पितृ दोष शांत होता है।
तुलसी के पौधे के पास शाम को घी का दीपक जलाएं और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें। ऐसा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ-साथ पितृ देवों की भी कृपा मिलती है।
अष्टमी की रात घर की छत या बालकनी में दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके एक दीपक रखें। यह दीपक पितरों के लिए मार्गदर्शक ज्योति माना जाता है, जिससे उनकी आत्मा को शांति मिलती है।
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