
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को भाद्रपद अमावस्या, कुशोत्पाटिनी अमावस्या और पिठोरी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। यह पावन तिथि पितरों के तर्पण व स्नान-दान के लिए समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अमावस्या की रात नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, लेकिन अगर आप इस दिन सही विधि और सही स्थान पर दीपदान करते हैं, तो न केवल नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, बल्कि माता लक्ष्मी और पूर्वजों का आशीर्वाद भी मिलता है। आइए जानते हैं कि इस दिन घर के किन मुख्य स्थानों पर दीपक जलाना चाहिए?
शास्त्रों के अनुसार, दक्षिण दिशा पितरों और यमराज की दिशा मानी गई है। अमावस्या की शाम घर के दक्षिण कोने में या ईशान कोण से दक्षिण की ओर मुख करके सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इससे पितृ प्रसन्न होकर पूरे परिवार को आरोग्य, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं और कुंडली से पितृ दोष का प्रभाव कम होता है।
घर का मुख्य द्वार वह स्थान है, जहां से माता लक्ष्मी प्रवेश करती हैं। भाद्रपद अमावस्या की शाम सूर्यास्त के समय घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर चौमुखी दीपक जलाएं। ऐसा माना जाता है कि मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से घर से दरिद्रता दूर होती है और मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।
सनातन धर्म में तुलसी का पौधा बहुत पवित्र माना गया है। अमावस्या की शाम तुलसी के पौधे के पास शुद्ध देसी घी का दीपक जरूर जलाएं और 7 बार परिक्रमा करें। तुलसी के पास दीपक जलाने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की कृपा मिलती है, जिससे घर की आर्थिक तंगी दूर होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीपल के वृक्ष में त्रिदेव के साथ-साथ पितरों का भी वास माना जाता है। अमावस्या के दिन शाम के समय पास के किसी पीपल के वृक्ष के पास सरसों के तेल का दीपक जलाएं। पीपल के नीचे दीपक जलाने से शनि और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
घर में रसोईघर के पास जहां पीने का पानी रखा जाता है, उस स्थान को शास्त्रों में बेहद पवित्र माना गया है। अमावस्या की रात वहां तिल के तेल का दीपक जलाएं। कहते हैं कि यहां दीपक जलाने से घर में अन्न-धन की बरकत बनी रहती है और परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
Connect with India's best astrologers




