
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को बेहद कल्याणकारी माना गया है। प्रत्येक माह के दोनों पक्षों (शुक्ल और कृष्ण पक्ष) की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है, जब त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। मंगलवार का दिन हनुमान जी और मंगल ग्रह को समर्पित है, जबकि त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को अर्पित है। इसलिए भौम प्रदोष का संयोग शिव जी और मंगल देव दोनों की असीम कृपा पाने के लिए बहुत फलदायी माना जाता है। अगर किसी जातक की शादी में लगातार बाधाएं आ रही हैं, तो भौम प्रदोष व्रत के दिन (Bhauma Pradosh Vrat 2026) शिवलिंग पर कुछ खास चीजें अर्पित करने से जल्द शादी के योग बनते हैं। आइए उन सामग्री के बारे में जानते हैं।
शादी में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए भौम प्रदोष की शाम शिवलिंग पर कच्चे दूध में थोड़ा सा केसर मिलाकर अभिषेक करें। इसके बाद शुद्ध गंगाजल अर्पित करें। इससे कुंडली में बृहस्पति और चंद्रमा मजबूत होते हैं और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।
भौम प्रदोष के दिन शिवलिंग पर लाल चंदन का लेप लगाएं और लाल कनेर या गुड़हल के फूल अर्पित करें। लाल रंग मंगल ग्रह का प्रतीक है, जिससे कुंडली का मंगल दोष शांत होता है और शादी से जुड़ी मुश्किलें दूर होती हैं।
अगर रिश्ते बार बार होकर टूट जाते हैं या बात आगे नहीं बढ़ती, तो जल में थोड़ा सा शहद और देशी शक्कर मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे वाणी और जीवन में मिठास आती है और विवाह के पक्के होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
भौम प्रदोष के दिन शिवलिंग पर थोड़ी सी भीगी हुई लाल मसूर की दाल अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है। इससे मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं और शादी से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।
पूजा हमेशा सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद (प्रदोष काल) में करें।
लाल या पीले वस्त्र पहनकर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।
गंगाजल से शिव जी का अभिषेक करें।
जलाभिषेक करते समय लगातार का जप करें।
शिवलिंग पर सफेद चंदन से त्रिपुंड बनवाएं।
बिल्व पत्र, सफेद फूल और शमी पत्र अर्पित करें।
फल मिठाई और खीर का भोग लगाएं।
प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
पूजा के अंत में गाय के घी का दीपक जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
इसके बाद शंखनाद करें और पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।
भौम प्रदोष व्रत रखने से न केवल शीघ्र विवाह के योग बनते हैं, बल्कि व्यक्ति को कर्ज से मुक्ति और शारीरिक रोग दोषों से भी छुटकारा मिलता है। साथ ही माता पार्वती और भगवान शिव की कृपा से साधक का पारिवारिक जीवन सुख, शांति से भर जाता है।
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