
Chaitra Navratri Day 2: हर साल चैत्र मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि प्रारंभ होती है और रामनवमी पर समाप्त होती है। इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से प्रारंभ होकर 26 मार्च तक रहेगी। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को पूजा जाता है। कल नवरात्रि का दूसरा दिन है और दूसरे दिन पर माता ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। तो चलिए जान लेते हैं कि किस मुहूर्त में और किस विधि से माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करनी चाहिए।
चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन माता ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है, मां दुर्गा का ये स्वरूप तपस्वी माना गया है। कल यानी कि 20 मार्च को माता ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाएगी। ये आध्यात्म और अनुशासन का कारक मानी जाती हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन पर श्रद्धालु बाहरी शुद्धि ना करते हुए आंतरिक शुद्धि करते हैं। मां ब्रह्मचारिणी ने एक हाथ में जप माला रखा है और दूसरे हाथ में कमंडल धारण किया हुआ है। यदि आप भी अपने जीवन में शांति लाना चाहते हैं, कलह-कलेश से खुद को दूर करना चाहते हैं तो आपको दूसरे दिन पर इस विधि से पूजन करना चाहिए।
ब्रह्म मुहूर्त - 04:50 ए एम से 05:37 ए एम
प्रातः सन्ध्या - 05:14 ए एम से 06:25 ए एम
अभिजित मुहूर्त - 2:04 पी एम से 12:53 पी एम
विजय मुहूर्त - 02:29 पी एम से 03:18 पी एम
गोधूलि मुहूर्त - 06:29 पी एम से 06:53 पी एम
सायाह्न सन्ध्या- 06:32 पी एम से 07:43 पी एम
अमृत काल- 12:13 ए एम, मार्च 21 से 01:43 ए एम, मार्च 21
निशिता मुहूर्त - 12:04 ए एम, मार्च 21 से 12:51 ए एम, मार्च 21
सर्वार्थ सिद्धि योग - पूरे दिन रहने वाला है।
अमृत सिद्धि योग - 06:25 ए एम से 02:27 ए एम, मार्च 21
नवरात्रि के दूसरे दिन, सुबह की पूजा-अर्चना पूरी करने के बाद, पूजा स्थल को अच्छी तरह से साफ करें।
इसके बाद ध्यान दें कि आपने जिस कलश की स्थापना की है, उसके आस-पास का क्षेत्र भी पूरी सावधानी के साथ साफ किया गया हो।
इसके अलावा अखंड ज्योति में पर्याप्त मात्रा में घी डालें, ताकि वह बिना किसी रुकावट के जलती रहे।
यदि आपके पास देवी ब्रह्मचारिणी का चित्र या मूर्ति है, तो उसे एक चौकी पर स्थापित करें और देवी की पूजा शुरू करें।
शास्त्रों में देवी ब्रह्मचारिणी को सफेद और लाल रंग से जोड़ा जाता है, तो आप ये रंग पहन सकते हैं।
इसके बाद देवी ब्रह्मचारिणी के आगे धूप और अगरबत्ती जलाएं और व्रत कथा का पाठ करें और फिर आरती करें।
आप मां ब्रह्मचारिणी के इस मंत्र ह्रीं श्री अम्बिकायै नम: का जाप कर सकते हैं।
देवी को भोग के रूप में मखाने की खीर या सफेद मिठाई अर्पित करें।
पूजा संपन्न के बाद क्षमा प्रार्थना करें।
Connect with India's best astrologers




