Dhanteras 2026 Gold Buying Muhurat And Puja Vidhi: आज धनतेरस का पावन पर्व मनाया जा रहा है। ऐसे में आइए सोना-चांदी, बर्तन व झाड़ू खरीदने का शुभ मुहूर्त, भगवान धन्वंतरि और मां लक्ष्मी की पूजा विधि जानते हैं।
दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व की शुरुआत धनतेरस के साथ होती है। कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व धन, सेहत और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत कलश लेकर भी प्रकट हुए थे। इसके साथ ही इस दिन धन के देवता कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। धनतेरस पर सोना, चांदी, नए बर्तन और झाड़ू खरीदना बेहद शुभ माना जाता है, क्योंकि ऐसा करने से घर में सालभर बरकत बनी रहती है। आइए धनतेरस (Dhanteras 2026) पर खरीदारी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इससे जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।
धनतेरस 2026 तिथि और खरीदारी का शुभ मुहूर्त (Dhanteras 2026 Gold Buying Muhurat)
पूजा मुहूर्त: शाम 06 बजकर 19 मिनट से 08 बजकर 17 मिनट तक
प्रदोष काल: शाम 05 बजकर 49 मिनट से 08 बजकर 23 मिनट तक
वृषभ काल: शाम 06 बजकर 19 मिनट से 08 बजकर 17 मिनट तक
धनतेरस के दिन आप सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दिन भर किसी भी समय खरीदारी कर सकते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04 बजकर 58 मिनट से 05 बजकर 50 मिनट तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02 बजकर 06 मिनट से 02 बजकर 50 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 05 बजकर 48 मिनट से 06 बजकर 14 मिनट तक
निशिता मुहूर्त: रात्रि 11 बजकर 49 मिनट से 12 बजकर 41 मिनट तक
धनतेरस पर क्या खरीदें और क्या न खरीदें?
क्या खरीदें: सोना, चांदी, पीतल के बर्तन, धनिया के बीज, साबुत अक्षत और नई झाड़ू। ऐसा माना जाता है कि झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, इसे घर लाने से दरिद्रता दूर भागती है।
क्या न खरीदें: लोहे, स्टील, एल्युमीनियम या कांच के बर्तन और नुकीली चीजें जैसे कि कैंची, चाकू आदि, धनतेरस के दिन भूलकर भी न खरीदें।
धनतेरस की सरल पूजन विधि (Dhanteras 2026 Puja Rituals)
शाम को स्नान के बाद घर के मंदिर या उत्तर-पूर्व दिशा में एक चौकी बिछाएं।
उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान धन्वंतरि, धन कुबेर और मां लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
सभी देवी-देवताओं को रोली, अक्षत और चंदन का तिलक लगाएं।
भगवान धन्वंतरि को पीले फूल और मां लक्ष्मी को कमल या गुलाब का फूल अर्पित करें।
इस दिन भगवान धन्वंतरि को पीली मिठाई या खीर का भोग लगाएं और कुबेर जी को धनिया व गुड़ का भोग लगाएं।
एक बड़ा घी का दीपक जलाएं और शाम को यमराज के नाम का चौमुखी दीपक घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर करके रखें।
अंत में भव्य आरती करें और शंखनाद करें।
पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।
धनतेरस का महत्व (Dhanteras 2026 Significance)
पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवताओं और दैत्यों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था, तो कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन ही भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे। वे कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन नए बर्तन और धातु की वस्तुएं खरीदने की परंपरा शुरू हुई। इसके साथ ही इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा का भी विधान है।
।।भगवान धन्वन्तरि जी की आरती।।
ॐ जय धन्वन्तरि देवा, स्वामी जय धन्वन्तरि जी देवा।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।।
स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा ॥