
दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व की शुरुआत धनतेरस के पावन दिन से होती है। इस दिन सोने-चांदी, बर्तन और अन्य शुभ चीजों के साथ-साथ भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की नई मूर्ति खरीदने की बेहद पुरानी परंपरा है। दीपावली की रात इन्हीं मूर्तियों की विधि-विधान से पूजा की जाती है, ताकि घर में सुख, समृद्धि और धन का आगमन हो सके। लेकिन मूर्ति खरीदते समय अक्सर लोग जाने-अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका बुरा असर घर की सुख-शांति पर पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि धनतेरस पर गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति खरीदते समय किन जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए?
आजकल बाजार में दिखने में बहुत सुंदर और चमकीली मूर्तियां मिलने लगी हैं, जो प्लास्टर ऑफ पेरिस, प्लास्टिक या सिंथेटिक मटेरियल से बनी होती हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ऐसी मूर्तियां घर में लाना बिल्कुल शुभ नहीं माना जाता है। हमेशा मिट्टी, पीतल, चांदी या अष्टधातु से बनी मूर्ति ही खरीदें। मिट्टी की मूर्ति को सबसे पवित्र माना गया है।
दुकान से जब भी गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति खरीदें, तो उसे अच्छी तरह जांच लें। मूर्ति कहीं से भी खंडित हुई नहीं होनी चाहिए। खंडित मूर्ति की पूजा करना अशुभ माना जाता है और इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
गणेश जी और माता लक्ष्मी की ऐसी मूर्ति खरीदें, जिसमें उनके बैठने की मुद्रा हो। माता लक्ष्मी की बैठी हुई मुद्रा वाली मूर्ति सबसे शुभ मानी जाती है, क्योंकि बैठी हुई मां लक्ष्मी को स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा ध्यान रखें कि गणेश जी की सूंड बाईं ओर मुड़ी हुई हो और मां लक्ष्मी कमल के फूल पर विराजमान हों।
मूर्ति खरीदते समय यह भी जरूर देखें कि भगवान गणेश के पास उनका वाहन मूषक राज और माता लक्ष्मी के पास उनका वाहन उल्लू जरूर बना हो। इसके साथ ही माता लक्ष्मी के हाथों से धन की वर्षा हो रही हो, ऐसी मूर्ति लाना बहुत ही शुभ माना जाता है।
घर के मंदिर के आकार को ध्यान में रखकर ही मूर्ति खरीदें। बहुत बड़ी मूर्तियां घर में रखना वास्तु के नियमों के अनुसार शुभ नहीं मानी जाती है। मूर्ति इतनी मध्यम आकार की होनी चाहिए, जिसे आप आसानी से अपने पूजा घर में स्थापित कर सकें।
Connect with India's best astrologers




