
आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला दशहरा का पर्व पूरे देश में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। वहीं इसे विजयादशमी के नाम से पुकारा जाता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या विजयादशमी और दशहरा दोनों अलग-अलग हैं या एक ही हैं? आइए यहां इसके बीच के अंतर को समझते हैं।
आसान शब्दों में कहें तो दशहरा और विजयादशमी एक ही त्योहार के दो अलग-अलग नाम और पहलू हैं, लेकिन इन्हें मनाने के पीछे दो अलग-अलग पौराणिक कथाएं हैं। आश्विन महीने की दशमी तिथि होने के कारण इसे दशहरा कहा जाता है, और इसी दिन बुराइयों पर विजय प्राप्त की गई थी, इसलिए इसे विजयादशमी भी कहा जाता है।
आइए दोनों के पीछे की मुख्य कथाओं को जानते हैं:
विजयादशमी नाम का संबंध मां दुर्गा और महिषासुर के वध से जुड़ा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस के साथ लगातार नौ दिनों और रातों तक भयंकर युद्ध किया था। इसके बाद आश्विन महीने की दशमी तिथि को माता ने महिषासुर का वध करके देवताओं और पूरे संसार को उससे मुक्ति दिलाई थी।
शमी वृक्ष की पूजा: इस दिन दक्षिण भारत और कई अन्य राज्यों में शमी के पेड़ की पूजा करने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि पांडवों ने भी अपने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र शमी के पेड़ पर छिपाए थे और विजयदशमी के दिन उन्हें वापस प्राप्त किया था।
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दूसरी तरफ, दशहरा शब्द त्रेतायुग से जुड़ा है। इस दिन भगवान श्री राम ने लंका के राजा रावण का वध किया था और माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। रावण के 10 सिर थे, जिन्हें अहंकार, क्रोध, लोभ आदि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए रावण के वध और उसके पुतले के दहन के उत्सव को दशहरा कहा जाने लगा। इस दिन असत्य पर सत्य की और अधर्म पर धर्म की जीत का जश्न मनाया जाता है।
बुराई पर अच्छाई की जीत: चाहे हम रावण दहन की बात करें या मां दुर्गा द्वारा महिषासुर वध की, दोनों ही घटनाएं हमें यह सिखाती हैं कि पाप और अहंकार चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में जीत हमेशा सत्य और अच्छाई की ही होती है।
नया काम शुरू करने के लिए शुभ दिन: विजयादशमी को अबूझ मुहूर्त यानी सबसे शुभ दिन माना जाता है। इस दिन किसी भी नए काम की शुरुआत करना, वाहन खरीदना, गृह प्रवेश करना या बच्चों की पढ़ाई शुरू करना बेहद शुभ माना जाता है।
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