
हिंदू धर्म में दीपावली का पर्व धन, सुख और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी की पूजा का सबसे बड़ा दिन होता है। हर कोई इस दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह के उपाय करते हैं, लेकिन मां लक्ष्मी से जुड़ा एक ऐसा रहस्य है जो कई लोगों को सोच में डाल देता है। आखिर मां लक्ष्मी ने उल्लू को ही अपने वाहन के रूप में क्यों चुना?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार सभी देवी-देवता अपने-अपने वाहन का चुनाव कर रहे थे। उसी समय मां लक्ष्मी भी अपने लिए एक वाहन चुन रही थीं। धरती के सभी पशु और पक्षी मां लक्ष्मी का वाहन बनने के लिए उत्सुक थे। तब मां लक्ष्मी ने सभी को अपनी-अपनी विशेषता बताने को कहा। उल्लू ने मां लक्ष्मी से कहा कि वह रात के घने अंधेरे में भी साफ देख सकता है और वह हमेशा एकांत में रहकर शांत मन से ध्यान लगाता है। उल्लू की निष्ठा को देखकर माता लक्ष्मी बहुत प्रसन्न हुईं और उन्होंने उल्लू को अपना वाहन स्वीकार कर लिया।
ज्योतिष और अध्यात्म के नजरिए से देखा जाए तो उल्लू को मां लक्ष्मी का वाहन होना, हमें एक बहुत बड़ी सीख देता है। उल्लू को दिन की तेज रोशनी में कुछ दिखाई नहीं देता, उसे केवल रात के अंधेरे में ही साफ दिखता है। इसका सीधा मतलब यह है कि जो लोग धन-दौलत और भौतिक सुख-सुविधाओं में ज्यादा शामिल हो जाते हैं, वे सत्य को नहीं देख पाते हैं। मां लक्ष्मी हमें उल्लू के जरिए समझाती हैं कि धन आने पर कभी घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि हमेशा शांत रहना चाहिए।
उल्लू अपनी आंखें कभी भी पूरी तरह बंद नहीं करता और बहुत ही शांत स्वभाव से हर गतिविधि पर नजर रखता है। धन कमाना जितना मुश्किल है, उससे ज्यादा मुश्किल है धन को संभालकर रखना। उल्लू की यह सतर्कता हमें सिखाती है कि अपने धन का सही इस्तेमाल करने और उसकी रक्षा करने के लिए हमेशा जागरूक रहना चाहिए।
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