
शारदीय नवरात्रि के दौरान मनाया जाने वाला दुर्गा पूजा का पावन पर्व बेहद भव्यता और भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। इस दौरान मां दुर्गा की पूजा का विधान है। कल्पारंभ से शुरू होकर प्रतिमा विसर्जन तक चलने वाला यह उत्सव सभी को आध्यात्मिक शक्ति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देता है। इस साल दुर्गा पूजा का उत्सव 16 अक्टूबर से शुरू होकर 21 अक्टूबर तक पूरे 6 दिनों तक धूमधाम से मनाया जाएगा, तो आइए यहां जानते हैं कल्पारंभ से लेकर सिंदूर खेला की सही डेट और शुभ मुहूर्त।
दुर्गा पूजा की शुरुआत 16 अक्टूबर को कल्पारंभ के साथ होगी। इस दिन मां दुर्गा को कलश या बिल्व वृक्ष में विराजमान होने के लिए आमंत्रित किया जाता है। कहते हैं कि इसी दिन मां दुर्गा, भगवान श्री गणेश, कार्तिकेय, माता सरस्वती और माता लक्ष्मी की मूर्तियों की पूजा शुरू होती है।
दुर्गा पूजा का दूसरा दिन महासप्तमी के रूप में मनाया जाएगा। 17 अक्टूबर को नवपत्रिका पूजा होगी। इस दिन देवी दुर्गा का पावन महास्नान कराया जाता है, जिसके बाद मूर्तियों का प्राण प्रतिष्ठा कर षोडशोपचार विधि से पूजा की जाती है। साथ ही माना जाता है कि इस दिन नौ पौधों से मिलकर बनी 'नवपत्रिका' को स्नान कराकर पूजा पांडाल में स्थापित किया जाता है।
इस साल पंचांग की गणना के आधार पर सप्तमी तिथि दो दिनों तक रहेगी। इसलिए 18 अक्टूबर को भी महासप्तमी का पूजन किया जाएगा, जो दुर्गा उत्सव का तीसरा दिन रहेगा। इस दिन भी पांडालों में पूजा-अर्चना और आरती आयोजित होगी।
दुर्गा पूजा में महाअष्टमी का दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल महाष्टमी 19 अक्टूबर को पड़ रही है। इस दिन मां महागौरी की विशेष आराधना की जाती है। अष्टमी तिथि के समापन और नवमी तिथि के प्रारंभ के संधिकाल में 'संधि पूजा' की जाएगी। यह समय देवी के चामुंडा स्वरूप की पूजा के लिए परम फलदायी माना गया है।
महानवमी का दिन दुर्गा पूजा का पांचवां दिन रहेगा। इस साल महानवमी 20 अक्टूबर को है। इस दिन मां दुर्गा के नवम स्वरूप की आराधना की जाती है। महानवमी पर भव्य हवन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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