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Dussehra 2026: दशहरे पर रावण दहन क्यों किया जाता है? जानें भगवान राम की विजय और पौराणिक कथा!

Vaishnavi DwivediVaishnavi DwivediUpdated 13 Oct 2026 03:30 PM IST
Dussehra 2026: दशहरे पर रावण दहन क्यों किया जाता है? जानें भगवान राम की विजय और पौराणिक कथा!

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Dussehra 2026 Significance: दशहरे के दिन रावण दहन क्यों किया जाता है? जानें भगवान राम और रावण के युद्ध की पौराणिक कथा।

सनातन धर्म में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों में दशहरा का स्थान बेहद खास है। यह पर्व असत्य पर सत्य की और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाए जाने वाले इस त्योहार पर देश भर में बड़े-बड़े मेले लगते हैं और रावण, कुंभकर्ण तथा मेघनाद के ऊंचे-ऊंचे पुतले जलाए जाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर साल दशहरे के दिन रावण का पुतला क्यों जलाया जाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा क्या है?

रावण दहन की पौराणिक कथा 

पौराणिक कथा के अनुसार, लंका का राजा रावण बहुत ही ज्ञानी और महाशक्तिशाली था, लेकिन उसके अंदर घमंड और अधर्म कूट-कूट कर भरा था। रावण ने छलपूर्वक माता सीता का अपहरण कर लिया था, जिसके बाद भगवान श्री राम और रावण के बीच भयानक युद्ध हुआ।  भगवान राम ने अपनी वानर सेना और भाई लक्ष्मण के साथ लंका पहुंचे। यह युद्ध कई दिनों तक चला, जिसमें रावण के भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाद सहित पूरी राक्षसी सेना का नाश हो गया।

आखिरकार, आश्विन महीने की दशमी तिथि को भगवान श्री राम ने रावण का वध किया और माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया। तभी से भगवान राम की इस विजय की खुशी में हर साल विजयदशमी का पर्व मनाया जाता है और रावण का पुतला दहन किया जाता है।

यह भी पढ़ें: Vijayadashami 2026: कब और कैसे किया जाता है मां दुर्गा का विसर्जन? नोट करें सही विधि 

रावण दहन क्यों किया जाता है? 

  • अहंकार और घमंड का अंत: रावण के पास अपार शक्ति, अपार धन-दौलत और 6 शास्त्रों का ज्ञान था, लेकिन उसे अपनी ताकत पर बहुत अहंकार था। रावण दहन हमें यह सिखाता है कि अहंकार चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसका नाश हमेशा निश्चित होता है।
  • बुराई पर अच्छाई की जीत: यह पर्व इस बात का उदाहरण है कि अधर्म और पाप का रास्ता चाहे कितना भी मजबूत लगे, अंत में विजय हमेशा सत्य, धर्म और न्याय की ही होती है।
  • मन के रावण का अंत: रावण के 10 सिर काम, क्रोध, लोभ, मोह, घमंड, ईर्ष्या, स्वार्थ, अन्याय अहंकार के प्रतीक हैं। ऐसे में इस दिन बाहर के रावण को जलाने के साथ-साथ अपने अंदर से इन 10 बुराइयों को भी खत्म करने का संकल्प लेना चाहिए।

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