
सनातन धर्म में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों में दशहरा का स्थान बेहद खास है। यह पर्व असत्य पर सत्य की और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाए जाने वाले इस त्योहार पर देश भर में बड़े-बड़े मेले लगते हैं और रावण, कुंभकर्ण तथा मेघनाद के ऊंचे-ऊंचे पुतले जलाए जाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर साल दशहरे के दिन रावण का पुतला क्यों जलाया जाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा क्या है?
पौराणिक कथा के अनुसार, लंका का राजा रावण बहुत ही ज्ञानी और महाशक्तिशाली था, लेकिन उसके अंदर घमंड और अधर्म कूट-कूट कर भरा था। रावण ने छलपूर्वक माता सीता का अपहरण कर लिया था, जिसके बाद भगवान श्री राम और रावण के बीच भयानक युद्ध हुआ। भगवान राम ने अपनी वानर सेना और भाई लक्ष्मण के साथ लंका पहुंचे। यह युद्ध कई दिनों तक चला, जिसमें रावण के भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाद सहित पूरी राक्षसी सेना का नाश हो गया।
आखिरकार, आश्विन महीने की दशमी तिथि को भगवान श्री राम ने रावण का वध किया और माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया। तभी से भगवान राम की इस विजय की खुशी में हर साल विजयदशमी का पर्व मनाया जाता है और रावण का पुतला दहन किया जाता है।
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