
हर साल गणेश चतुर्थी का पर्व बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर भक्त अपने घरों में भगवान श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित करते हैं और पूरे 10 दिनों तक उनकी सेवा, पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं और घर में सुख, शांति और समृद्धि लाते हैं, लेकिन बप्पा को घर लाते समय और उनकी स्थापना करते वक्त कुछ खास नियमों का पालन करना होता है। अनजाने में की गई छोटी-सी गलती भी पूजा के फल को कम कर सकती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि बप्पा को घर लाते समय किन गलतियों से बचना चाहिए?
घर में स्थापना के लिए हमेशा बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड (वाममुखी गणेश) वाले बप्पा की प्रतिमा लानी चाहिए। दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी (सिद्धिविनायक) की पूजा के नियम बहुत ही कठिन होते हैं, जिनका पालन गृहस्थ जीवन में करना आसान नहीं होता है।
बाजार से बप्पा की प्रतिमा लेते समय अच्छी तरह जांच लें। मूर्ति कहीं से भी खंडित नहीं होनी चाहिए। खंडित मूर्ति की स्थापना करना अशुभ माना जाता है।
जब भी आप बप्पा की मूर्ति दुकान से घर लाएं, तो उनका मुख पीले, लाल या नारंगी रंग के नए कपड़े से ढका होना चाहिए। मूर्ति को घर के मुख्य द्वार पर लाकर ही अक्षत और जल से स्वागत करने के बाद कपड़ा हटाना चाहिए।
शास्त्रों में माना गया है कि भगवान गणेश की पीठ में दरिद्रता का वास होता है। इसलिए बप्पा की मूर्ति इस तरह स्थापित करें कि किसी की भी नजर उनकी पीठ पर न पड़े। मूर्ति की पीठ दीवार से सटकर होनी चाहिए।
गणेश जी की पूजा में गलती से भी तुलसी दल का प्रयोग न करें। पौराणिक कथाओं के अनुसार, तुलसी जी के एक श्राप के कारण गणेश पूजन में तुलसी वर्जित हैं। बप्पा को केवल दूर्वा ही चढ़ाएं।
बप्पा को घर लाते समय हमेशा परिवार के सदस्यों के साथ जाएं और भजन या 'गणपति बप्पा मोरया' का जयकारा लगाते हुए आएं। दुकान से मूर्ति लेते समय उनके साथ थोड़ा सा अक्षत और दूर्वा जरूर रखें।
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