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Hariyali Teej 2026: कब है हरियाली तीज? जानिए शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

Devanand sharmaDevanand sharmaUpdated 13 Aug 2026 12:40 PM IST
Hariyali Teej 2026: कब है हरियाली तीज? जानिए शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

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Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज 2026 कब है?  पूजा का शुभ समय, व्रत विधि, मंत्र, धार्मिक फल, सिंधारा और सावन की खास परंपराएं।


Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज 2026 कब है?  पूजा का शुभ समय, व्रत विधि, मंत्र, धार्मिक फल, सिंधारा और सावन की खास परंपराएं।

Hariyali Teej 2026: कब है हरियाली तीज? जानिए शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि,

हरियाली तीज 2026: सावन की फुहार, चारों तरफ हरियाली, झूले की पेंग और हाथों में रची मेहंदी—हरियाली तीज आते ही मौसम भी त्योहार के रंग में रंगा नजर आता है। उत्तर भारत में यह पर्व खास तौर पर महिलाओं के बीच उत्साह से मनाया जाता है। पूजा के साथ हरे कपड़े, चूड़ियां, मेहंदी, तीज के गीत और मायके से आने वाला सिंधारा इसकी खास पहचान हैं।
इस साल हरियाली तीज 15 अगस्त 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार यह श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि होगी। तृतीया तिथि 14 अगस्त की शाम 6:46 बजे शुरू होकर 15 अगस्त की शाम 5:28 बजे तक रहेगी।

हरियाली तीज का धार्मिक महत्व
हरियाली तीज को सौभाग्य और दांपत्य सुख से जुड़ा पर्व माना जाता है। इस दिन माता गौरी की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा से व्रत और पूजन करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति, प्रेम और सौभाग्य की कामना की जाती है।
यह पर्व महिलाओं को अपनी पारिवारिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी देता है। नवविवाहिताओं के लिए पहली तीज का विशेष महत्व माना जाता है और कई परिवारों में इस मौके पर बेटी को मायके बुलाने की परंपरा है।

हरियाली तीज 2026 पूजा मुहूर्त
15 अगस्त को तृतीया तिथि शाम 5:28 बजे तक रहेगी। इसलिए पूजा तृतीया तिथि के भीतर करना उचित रहेगा। दिल्ली के पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्योदय 5:50 बजे और सूर्यास्त 7:01 बजे है। स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है l

हरियाली तीज का व्रत कैसे रखें?
व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को साफ करें। शिव-पार्वती या माता गौरी की प्रतिमा स्थापित करके व्रत का संकल्प लें।
पूजा में पहले गणेश जी का स्मरण करें। इसके बाद शिवजी को जल, बेलपत्र और पुष्प अर्पित करें। माता गौरी को सिंदूर, मेहंदी, चूड़ी, बिंदी, चुनरी और सुहाग सामग्री चढ़ाएं। फल और मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के बाद तीज की कथा पढ़ें या सुनें और आरती करें।

हरियाली तीज के मंत्र
भगवान शिव की पूजा में ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप किया जा सकता है। माता गौरी के लिए ॐ पार्वत्यै नमः मंत्र का जाप करें।
श्रद्धा के अनुसार 108 बार मंत्र जाप करके सुखी दांपत्य और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की जा सकती है।



हरियाली तीज व्रत का फल
धार्मिक मान्यता के अनुसार हरियाली तीज का व्रत करने से सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना पूरी होने का आशीर्वाद मिलता है। सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और परिवार के मंगल की प्रार्थना करती हैं। अविवाहित युवतियां अच्छे जीवनसाथी की इच्छा से माता गौरी की आराधना करती हैं।

हरियाली तीज के ज्योतिषीय उपाय
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार तीज के दिन कुछ सरल उपाय किए जा सकते हैं।
वैवाहिक जीवन में मधुरता के लिए माता गौरी को लाल चुनरी और सुहाग सामग्री अर्पित करें।
शुक्र ग्रह की अनुकूलता के लिए सफेद मिठाई या चावल का दान करना शुभ माना जाता है। ज्योतिष में शुक्र को प्रेम, दांपत्य और सुख-सुविधाओं का कारक माना गया है।
चंद्रमा से जुड़े मानसिक तनाव को शांत करने की कामना से शिवलिंग पर जल चढ़ाकर ॐ नमः शिवाय का जाप किया जा सकता है।
शनि की अनुकूलता की कामना से, क्योंकि इस बार तीज शनिवार को है, काले तिल या सरसों के तेल का दान करने की परंपरा अपनाई जा सकती है।
इन उपायों को ज्योतिषीय विश्वास और धार्मिक आस्था के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

हरियाली तीज की खास परंपराएं
हरियाली तीज की रौनक पूजा के साथ इसकी लोक परंपराओं में भी दिखाई देती है। महिलाएं हरे रंग के कपड़े पहनती हैं, हाथों में मेहंदी लगाती हैं और हरी चूड़ियों से श्रृंगार करती हैं। कई जगह पेड़ों पर झूले डाले जाते हैं और महिलाएं तीज के लोकगीत गाती हैं।
मायके से बेटी के लिए भेजे जाने वाले सिंधारे में घेवर, मिठाई, मेहंदी, चूड़ियां, कपड़े और श्रृंगार की वस्तुएं शामिल होती हैं। इस परंपरा में बेटी के लिए मायके का स्नेह और आशीर्वाद जुड़ा होता है।

हरियाली तीज और सावन का रंग
तीज की खूबसूरती सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं रहती। सावन की बारिश के बीच झूले, लोकगीत और मेहंदी इस पर्व को उत्सव का रूप देते हैं। महिलाएं सखियों के साथ मिलकर तीज मनाती हैं और पारंपरिक गीतों के जरिए सावन की खुशियां साझा करती हैं।
यही वजह है कि हरियाली तीज धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारतीय लोक संस्कृति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
हरियाली तीज सावन में आने वाला ऐसा पर्व है जिसमें श्रद्धा, सौभाग्य और लोक परंपरा तीनों का सुंदर मेल दिखाई देता है।

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