
भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का पर्व मनाया जाता है। यह व्रत सभी व्रतों में बेहद कठिन और फलदायी माना गया है, जिसे सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, आरोग्य और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखती हैं। इस दिन कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा वर पाने के लिए यह निर्जला उपवास रखती हैं। शास्त्रों के अनुसार, सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए यह व्रत किया था। इस दिन बालू से भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश की प्रतिमा बनाकर पूजन करने का विधान है। आइए जानते हैं हरतालिका तीज की पूजा विधि से लेकर सभी जरूरी बातें।
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥
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