
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष के 16 दिन पूर्वजों को समर्पित हैं। आजकल लोग अपने घर या पास की किसी पवित्र नदी के किनारे भी पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। लेकिन हमारे शास्त्रों में भारत के कुछ ऐसे तीर्थ स्थलों के बारे में बताया गया है, जहां पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इसके साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए भारत के उन सबसे प्रमुख तीर्थ स्थानों के बारे में जानते हैं जहां पितृ पक्ष में पिंडदान करने का बहुत बड़ा महत्व है।
जब भी पिंडदान और श्राद्ध कर्म की बात आती है, तो गया जी का नाम सबसे ऊपर आता है। शास्त्रों में गया जी को पितृ तीर्थ कहा गया है। फल्गु नदी के तट पर स्थित गया जी के बारे में मान्यता है कि यहां खुद भगवान श्री राम ने अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान किया था। कहते हैं कि विष्णु पद मंदिर के पास या फल्गु नदी के तट पर पिंडदान करने से अतृप्त आत्माओं को भी तुरंत मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भगवान शिव की प्रिय नगरी काशी को मुक्ति और मोक्ष का द्वार माना जाता है। काशी में गंगा नदी के तट पर स्थित 'पिशाचमोचन कुंड' पितृ दोष निवारण और अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए पूर्वजों के श्राद्ध के लिए बहुत ही प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है कि यहां गंगा जी के पावन घाटों पर पिंडदान करने से पितरों को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।
गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम स्थल प्रयागराज को तीर्थराज कहा जाता है। पितृ पक्ष के दौरान त्रिवेणी संगम पर डुबकी लगाकर अपने पितरों के नाम से तर्पण और पिंडदान करने का विशेष फल मिलता है। ऐसा माना जाता है कि संगम तट पर श्राद्ध करने से सौ गुना ज्यादा पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
हरिद्वार भी पिंडदान के लिए बहुत पवित्र स्थान माना जाता है। हरिद्वार के 'हर की पौड़ी' और 'नारायणी शिला' पर पितृ पक्ष में तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा बेहद पुरानी है। इस धाम में नारायणी शिला पर पूजा करने से पितृ दोष और प्रेत बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
हिमालय की गोद में बसे बद्रीनाथ धाम के पास स्थित 'ब्रह्मा कपाल' घाट का बहुत ही विशेष महत्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि अगर आपने बद्रीनाथ धाम के ब्रह्मा कपाल पर एक बार अपने पूर्वजों का पिंडदान कर दिया, तो उसके बाद आपको जीवन में फिर कभी भी उनका पिंडदान करने की जरूरत नहीं होती है। ऐसा माना जाता है कि यहां श्राद्ध करने से पितरों को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
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