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Kamda Ekadashi 2026: कल रखा जाएगा कामदा एकादशी का व्रत, जानें तिथि, पूजन विधि, आरती

शालू मिश्राशालू मिश्राUpdated 28 Mar 2026 06:25 PM IST
Kamda Ekadashi 2026: कल रखा जाएगा कामदा एकादशी का व्रत, जानें तिथि, पूजन विधि, आरती

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Kamda Ekadashi 2026: कल रखा जाएगा कामदा एकादशी का व्रत, जानें तिथि, पूजन विधि, आरती

Kamda Ekadashi 2026: चैत्र माह शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को कामदा एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत रखने के महापाप भी नष्ट हो जाते हैं, पिशाच योनि से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 28 मार्च की सुबह 8 बजकर 45 मिनट से लेकर 29 मार्च की सुबह 7 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगा। व्रत 29 मार्च को किया जाएगा और 30 मार्च को व्रत का पारण किया जाएगा। पारण का समय सुबह 6 बजकर 13 मिनट से लेकर 7 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। 

इस विधि से करें कामदा एकादशी की पूजा 


सुबह उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
इसके बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें। 
चौंकी पर साफ वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। 
प्रभु को पीले रंग के फूल अर्पित करें क्योंकि ये रंग श्रीहरि को प्रिय है। 
माता लक्ष्मी को सोलह श्रृंगार अर्पित करें। 
इसके बाद दीपक जलाकर आरती करें और उनके विशेष मंत्रों का जाप करें। 
ईश्वर को फूल, सूखे मेवे, पंजीरी और पंचामृत का भोग लगाएं। 
अंत में क्षमा प्रार्थना करें और जीवन में सुख-शांति के लिए कामना करें। 
मंदिर में या जरूरतमंदों को अन्न और धन का दान करें। 

ऊँ जय जगदीश हरे 


ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे।

जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे।

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे।

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे।

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे।

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे।

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे।

विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे।

श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय जगदीश हरे।

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