
भारत की संस्कृति प्रकृति और ईश्वर को एक ही रूप में देखा गया है। इसी सांस्कृतिक का एक उदाहरण है करम पूजा। यह मुख्य रूप से झारखंड, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, और छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज द्वारा मनाया जाने वाला पर्व है। यह दिन प्रकृति और भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व आदिवासी समुदाय के लिए बहुत महत्व रखता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि करम देवता कौन हैं और इस पूजा का क्या महत्व है?
आदिवासी लोक परंपराओं में करम देवता को कर्म और कृषि समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करम देव जीवन में सुख, शांति, और फसलों की रक्षा करते हैं। इस दिन करम वृक्ष की एक डाल को पूजा स्थल पर स्थापित किया जाता है और उसकी पूजा-अर्चना की जाती है। माना जाता है कि करम देव की कृपा से फसलों पर आने वाले कीट-पतंगे नष्ट हो जाते हैं और घर में धन-धान्य की कमी नहीं होती है।
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