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कुंडली में पितृ दोष (How to Identify Pitru Dosh in Kundali) की पहचान कैसे करें? आइए यहां इससे जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।
पितृ पक्ष का समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह समय पितरों को समर्पित है। कहते हैं कि इस दौरान पितृ धरती पर आते हैं और अपने परिवार के लोगों को आशीर्वाद देते हैं। साथ ही सभी कष्टों को दूर करते हैं। वहीं, कुछ लोगों के मन में ये सवाल अक्सर आता है कि कुंडली में मौजूद पितृ दोष की पहचान कैसे होती है? जिससे इसका निवारण किसी जानकार पुरोहित से कराया जा सके। ऐसे में अगर आपके मन में भी यह सवाल लगातार आ रहा है, तो आपकी इस कन्फ्यूजन को आज हम दूर करेंगे।
पितृ दोष पर कुंडली में मिलते हैं ये बड़े संकेत
गृह क्लेश
ऐसा कहते हैं कि अगर किसी के कुंडली में पितृ दोष है, तो उसके घर में बिना वजह गृह क्लेश बना रहता है। छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई इतनी बढ़ जाती है कि उसे संभाल पाना मुश्किल होता है। हालांकि इसके निवारण के लिए किसी जानकारी पंडित से पूजा करवानी चाहिए और दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए।
बनते-बनते कामों का बिगड़ना
कई बार ऐसा होता है कि कोई काम पूरा होने के बाद खराब हो जाता है। कार्यक्षेत्र में डील होते होते टूट जाती है। यह भी पितृ दोष का बड़ा संकेत है। अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो अपने भोजन से पांच हिस्सा निकालें। इसके बाद उसे गाय, कौए, कुत्ते, चींटियों और जरूरतमंद को खिलाएं।
शादी विवाह में रुकावटें
अगर किसी जातक के विवाह में लगातार बाधा आ रही है, तो उन्हें भी कुंडली में पितृ दोष की जांच किसी जानकार पंडित से करवानी चाहिए। साथ ही उसके मुक्ति के उपाय करने चाहिए।
संतान से जुड़ी मुश्किलें
कहते हैं कि अगर कुंडली में पितृ दोष है, तो व्यक्ति को संतान से जुड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
कुंडली में कैसे बनता है पितृ दोष?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नवग्रहों में सूर्य को पिता व आत्मा का और चंद्रमा को माता व मन का कारक माना जाता है। जब इन पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव पड़ता है, तो पितृ दोष बनता है। अगर जन्म कुंडली के किसी भी भाव में सूर्य के साथ राहु या केतु बैठे हों, तो इसे मुख्य पितृ दोष माना जाता है। इसके अलावा कुंडली का नवम भाव धर्म और पितरों का भाव होता है। अगर नवम भाव में राहु, केतु या शनि स्थित हों या नवम भाव का स्वामी पीड़ित हो, तो पितृ दोष बनता है। इसके साथ ही चंद्रमा पर राहु या केतु का प्रभाव, बृहस्पति पर राहु का प्रभाव हो, तो यह भी पितृ दोष को दिखाता है।
पितृ दोष से मुक्ति पाने के सरल उपाय
- पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों की तिथि पर दोपहर के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल, काले तिल और कुश से तर्पण करें।
- हर अमावस्या तिथि पर किसी गरीब या ब्राह्मण को अन्न, तिल, गुड़ और वस्त्र दान करें।
- रोज शाम को या विशेष रूप से अमावस्या की शाम घर की दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
- शनिवार और अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं और सात बार परिक्रमा करें। साथ ही शाम के समय दीपक जलाएं।
- इसके अलावा बिहार के गया जी या काशी के पिशाच मोचन कुंड पर जाकर विधिवत त्रिपिंडी श्राद्ध कराएं।