
Paush Purnima: हिंदू पंचांग में सभी तिथियों को विशेष दर्जा दिया गया है, हर महीने कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को अमावस्या कहते हैं और शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा तिथि कहते हैं। पूर्णिमा के दिन चांद पूर्ण निकलता है, और इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। इसी प्रकार पौष मास की पूर्णिमा को विशेष दर्जा दिया गया है क्योंकि इस दिन जातक सरल उपायों को करने से सभी बाधाओं का नाश होता है और ईश्वर का आशीर्वाद बना रहता है।
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 5 बजकर 25 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 5 बजकर 34 मिनट से शाम 6 बजकर 2 मिनट तक
अमृत काल मुहूर्त- सुबह 8 बजकर 33 मिनट से सुबह 9 बजकर 58 मिनट तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 2 बजकर 9 मिनट से दोपहर 2 बजकर 51 मिनट तक
निशिता मुहूर्त- रात्रि 11 बजकर 58 मिनट से 4 जनवरी की रात्रि 12 बजकर 53 मिनट तक
Connect with India's best astrologers




