Karwa Chauth 2026: पहली बार करवा चौथ का व्रत कैसे करें? आइए करवा चौथ की पूजन सामग्री, सुहागिनों के लिए जरूरी नियम, पूजा विधि और करवा माता की पौराणिक कथा पढ़ते हैं।
सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ का व्रत सबसे बड़ा और पावन पर्व माना जाता है। अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए महिलाएं पूरे दिन बिना पानी पिए निर्जला व्रत रखती हैं। वहीं, जिन महिलाओं का यह पहला करवा चौथ है, उनके मन में पूजा को लेकर कई सवाल होते हैं कि शुरुआत कैसे करें, पूजा में क्या-क्या सामान लगेगा और शाम को चांद को अर्घ्य कैसे दें? ऐसे में अगर आप भी पहली बार करवा चौथ का व्रत करने जा रही हैं, तो घबराएं नहीं। आइए यहां करवा चौथ (Karwa Chauth 2026) की पूजा सामग्री, कथा और पूजा विधि जानते हैं।
पूजा के लिए जरूरी सामग्री (Karwa Chauth 2026 Puja Samagri List)
मिट्टी का करवा और ढक्कन (या पीतल का करवा)
करवे की सींक, छलनी, दीपक और कलावा
अक्षत, रोली, चंदन, धूप-अगरबत्ती
मां पार्वती के लिए 16 शृंगार का सामान
मिठाई, फल, गेहूं के दाने या चावल
चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए लोटा और कच्चा दूध
करवा चौथ के शुभ मुहूर्त (Karwa Chauth 2026 Shubh Muhurat)
चंद्रोदय समय: इस दिन चंद्रोदय रात 08 बजकर 17 मिनट पर होगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त: पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 38 मिनट से शाम 06 बजकर 56 मिनट तक रहेगा।
सरगी का समय: सुबह 03 बजकर 30 मिनट से 05 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।
सरगी का सेवन: करवा चौथ के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर सास द्वारा दी गई सरगी खाएं। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
16 शृंगार: दिनभर निर्जला व्रत रखें। शाम के समय लाल या पीले रंग के कपड़े पहनकर पूरा 16 शृंगार करें।
चौकी स्थापना: शाम को घर के मंदिर में एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर शिव-पार्वती, कार्तिकेय और करवा माता की तस्वीर स्थापित करें।
करवा पूजन: मिट्टी के करवे में जल या गेहूं भरें, उसके ऊपर रोली-अक्षत लगाएं और ढक्कन में मिठाई या चीनी रखें। करवा माता को रोली, फल और 16 शृंगार अर्पित करें।
कथा सुनना और आरती: करवा चौथ की पावन कथा सुनें। आरती के साथ पूजा पूर्ण करें।
चंद्र दर्शन और अर्घ्य: रात को जब चांद निकले, तो छलनी में दीपक रखकर पहले चांद को देखें, फिर छलनी से अपने पति का चेहरा देखें। इसके बाद चंद्रमा को लोटे से जल व दूध अर्पित कर अर्घ्य दें।
व्रत खोलना: चांद की पूजा के बाद पति के हाथों से पानी पीकर अपना व्रत पूरा करें और घर के बड़ों का आशीर्वाद लें।
करवा चौथ की कथा (Karwa Chauth Katha)
प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार, वीरावती नाम की एक पतिव्रता कन्या थी। शादी के बाद उसने अपना पहला करवा चौथ का व्रत रखा था। व्रत के दौरान भूख-प्यास से उसकी तबियत बिगड़ने लगी। उसके सात भाइयों से बहन की यह परेशानी देखी नहीं गई, जिसके चलते भाइयों ने पहाड़ी के पीछे आग जलाकर छलनी से नकली चांद दिखा दिया और बहन से कहा कि चांद निकल आया है। वीरावती ने भाइयों की बात मानकर जैसे ही भोजन का पहला निवाला मुंह में डाला, उसे खबर मिली कि उसके पति की मृत्यु हो गई है। तब वीरावती ने रोते हुए देवी पार्वती की कठिन तपस्या की। माता पार्वती प्रकट हुईं और उन्होंने बताया कि तुमने नकली चांद देखकर व्रत तोड़ दिया था।
वीरावती ने अपनी भूल की क्षमा मांगी और पूरे नियम से दोबारा करवा चौथ का व्रत रखा। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर करवा माता और मां पार्वती ने उसके पति को दोबारा जीवन दान दिया। कहते हैं कि करवाचौथ का व्रत रखने से पति को लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन का वरदान मिलता है।
पहला करवा चौथ करने वाली महिलाएं रखें ध्यान (Karwa Chauth 2026 Rules)
इस दिन तामसिक चीजों से पूरी तरह परहेज करें।
इस दिन काले या सफेद रंग के कपड़े बिल्कुल न पहनें।
पूजा के बाद अपनी सास या घर की बड़ी सुहागिन स्त्री को सुहाग का सामान और मिठाई देकर उनके पैर छुएं।
दिनभर मन में किसी के प्रति कड़वाहट न लाएं और भक्ति भाव बनाए रखें।