Pitru Paksha 2026: सप्तमी तिथि का श्राद्ध और तर्पण कैसे करना चाहिए? आइए यहां जानते हैं श्राद्ध के नियम, कुतुप काल मुहूर्त और जरूरी बातें।
आज सप्तमी तिथि का श्राद्ध मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में सप्तमी तिथि के श्राद्ध का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, जिन पूर्वजों का निधन किसी भी महीने की शुक्ल या कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को हुआ हो, उनका तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध इस दिन ही किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि सप्तमी तिथि पर किए गए तर्पण और पिंडदान से पूर्वजों की आत्मा को तुरंत तृप्ति मिलती है। साथ ही जिन परिवारों में पितृ कृपा बनी रहती है, वहां कभी भी धन-धान्य, आरोग्य और सुख-शांति की कमी नहीं होती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि सप्तमी श्राद्ध पर तर्पण और पिंडदान करने की सही विधि क्या है और इस दिन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
श्राद्ध के लिए सबसे शुभ समय कुतुप काल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध कर्म हमेशा दोपहर के समय ही करना चाहिए। दिन का आठवां मुहूर्त यानी कुतुप काल श्राद्ध और तर्पण के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस समय में बहुत सात्विकता होती है और हमारे द्वारा अर्पित किया गया जल व अन्न सीधे पितरों तक पहुंचता है।
सप्तमी श्राद्ध की तर्पण और पिंडदान विधि
दिशा और वस्त्र: स्नान करके पवित्र और हल्के रंग के कपड़े पहनें। तर्पण हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके ही किया जाता है।
कुशा की अंगूठी: अपनी अनामिका उंगली में कुशा की अंगूठी धारण करें।
तर्पण की सामग्री: तांबे या पीतल के पात्र में साफ जल लें। उसमें थोड़ा सा गंगाजल, कच्चा दूध, काले तिल और सफेद फूल मिलाएं।
अंगूठे के रास्ते जल दें: दोनों हाथों की अंजलि में जल भरकर अपने अंगूठे के रास्ते जल को किसी बर्तन या जमीन पर अर्पित करें। इसे 'पितृ तीर्थ' कहा जाता है। जल चढ़ाते समय अपने पितरों का ध्यान करें और उनसे आशीर्वाद मांगें।
पिंडदान की विधि: उबले हुए चावल, जौ का आटा, तिल और खोया मिलाकर गोल-गोल पिंड बनाएं। इन्हें भगवान विष्णु और पितरों का ध्यान करते हुए कुशा के ऊपर अर्पित करें।
पंचबलि भोग निकालें: भोजन तैयार होने के बाद सबसे पहले 5 हिस्से गाय, कुत्ते, कौवे, देव और चींटियों के लिए जरूर निकालें। इसके बिना श्राद्ध कर्म पूरा नहीं माना जाता।
ब्राह्मण या गरीब को भोजन: इसके बाद किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को घर बुलाकर भोजन कराएं और अपनी क्षमता अनुसार दान करें।
सप्तमी श्राद्ध पर ध्यान रखें ये बातें
श्राद्ध और तर्पण में हमेशा काले तिल का ही उपयोग करें, सफेद तिल का इस्तेमाल पितृ कर्म में वर्जित है।
घर पर पूरी तरह सात्विक भोजन बनाएं। लहसुन, प्याज या तामसिक चीजों का सेवन बिल्कुल न करें।
पितृ पक्ष के दौरान घर पर कोई आए, तो उसे भोजन या पानी जरूर दें। ऐसा माना जाता है कि इस अवधि में पितृ किसी भी रूप में आ सकते हैं।