Pitru Paksha 2026 Date: भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक चलने वाला पितृ पक्ष 2026 में कब शुरू होगा? आइए यहां 16 दिनों के श्राद्ध की तिथियों से लेकर सबकुछ जानते हैं।
सनातन धर्म में पितृ पक्ष का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है। हर साल भाद्रपद महीने की पूर्णिमा तिथि से लेकर आश्विन माह की अमावस्या तिथि तक के 16 दिनों की अवधि को पितृ पक्ष कहा जाता है। यह समय पूर्वजों को समर्पित है। कहते हैं कि यह उनकी आत्मा की शांति, उनका स्मरण करने और उनके प्रति अपनी श्रद्धा जाहिर करने का सबसे पावन समय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज पृथ्वी लोक पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा दिए गए तर्पण, पिंडदान और दान को स्वीकार करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल पितृ पक्ष (Pitru Paksha 2026 Date) कब से शुरू हो रहा है?
पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत और समापन तिथि (Pitru Paksha Start And End Date)
श्राद्ध और तर्पण का शुभ समय (Pitru Paksha Tarpana Muhurat)
श्राद्ध और तर्पण का कार्य हमेशा दोपहर के समय यानी कुतुप और रोहिण मुहूर्त किया जाता है। सुबह या सूर्यास्त के बाद श्राद्ध करना वर्जित माना गया है।
कुतुप मुहूर्त: दोपहर 11:45 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक।
पितृ तर्पण के नियम (Pitru Paksha Tarpana Rules)
तर्पण हमेशा कुतुप काल में करें। यह सुबह या रात में नहीं करना चाहिए।
तर्पण करते समय आपका मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए।
तांबे का लोटा, शुद्ध जल, कच्चा दूध, काले तिल और हाथ की उंगली में कुश की अंगूठी पहनें।
हाथ की अंजलि में जल तिल लेकर अंगूठे और तर्जनी के बीच वाले हिस्से से 3 बार जल नीचे गिराएं।
जल चढ़ाते समय ॐ पितृभ्यो नमः बोलें।
तर्पण के बाद भोजन में से गाय, कुत्ते, कौए, चींटी और ब्राह्मण के लिए 5 हिस्से जरूर निकालें।
पितृ पक्ष का धार्मिक महत्व (Pitru Paksha Significance)
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, पूर्वजों का ऋण चुकाना हर व्यक्ति का धर्म है, जो लोग पितृ पक्ष में अपने पितरों का श्रद्धापूर्वक तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन करवाते हैं, उनके पितृ प्रसन्न होकर उन्हें वंश वृद्धि, धन-समृद्धि, सुख-शांति और निरोगी काया का आशीर्वाद देते हैं। अगर किसी व्यक्ति को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि पता न हो, तो वे सर्वपितृ अमावस्या के दिन अपने सभी पितरों के नाम से श्राद्ध और दान कर सकते हैं।