
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष (Pitru Paksha 2026) का समय पूर्वजों के प्रति सम्मान और श्रद्धा जाहिर करने का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है, लेकिन इन सबके साथ ही पितृ पक्ष में दान करने का भी विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष में किए गए दान से न केवल पितृ तृप्त होते हैं, बल्कि अगर किसी जातक की कुंडली में पितृ दोष है, तो वह भी दूर होता है। आइए जानते हैं कि पितृपक्ष में किन चीजों का दान करना सबसे शुभ माना जाता है?
पितृ पक्ष में काले तिल का दान सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के पसीने से हुई है। श्राद्ध कर्म में बिना तिल के तर्पण अधूरा माना जाता है। ऐसे में किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को काले तिल का दान करने से पितरों को मोक्ष मिलता है और घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
सभी दानों में अन्नदान को महादान माना गया है। पितृपक्ष के दौरान गेहूं, चावल, दाल, आटा किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान करना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि अन्न दान करने से पितृ तृप्त होते हैं और कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती है।
गुड़ का दान करने से परिवार में कलह और अशांति दूर होती है और घर में मधुरता और खुशहाली आती है।
पितृ पक्ष में ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को धोती, गमछा या सात्विक वस्त्रों का दान करना चाहिए। ध्यान रखें कि दान किए जाने वाले वस्त्र नए हों। वस्त्र दान करने से पितरों की आत्मा को परम शांति मिलती है और जातक को आरोग्य का वरदान मिलता है।
गाय के दान को सभी पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। अगर आप गोदान करने में असमर्थ हैं, तो किसी गौशाला में जाकर गायों को हरा चारा, गुड़ या दाना-पानी दान करें। गो-सेवा करने से नाराज पितृ भी तुरंत खुश हो जाते हैं और घर के सारे संकट टल जाते हैं।
ऐसा कहा जाता है कि पितृपक्ष में बर्तन या अन्य उपयोगी धातुओं का दान करने से पितृ दोष का प्रभाव कम होता है।
गरुड़ पुराण के अनुसार, जूते, चप्पल का दान बेहद खास माना गया है। कहते हैं कि पितृपक्ष में किसी गरीब व्यक्ति को जूते और छाता दान करने से जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।
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