हिंदू धर्म में रक्षाबंधन का पर्व बेहद पावन माना गया है। यह दिन भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है। आइए यहां इस पर्व से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।
रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार और विश्वास का प्रतीक है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं। इस साल यह पर्व दिन शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्री कृष्ण और देवी द्रौपदी की कथा पढ़नी या सुननी चाहिए, जिसका वर्णन यहां पर भी किया गया है।
राखी बांधने का मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, राखी बांधने का शुभ समय 28 अगस्त की सुबह 06 बजकर 23 मिनट से सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक का है।
रक्षाबंधन से जुड़ी कथा
रक्षाबंधन को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं, जिसमें से हम यहां भगवान श्री कृष्ण और द्रौपदी की पावन कथा बता रहे हैं। एक बार भगवान श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया। उस दौरान चक्र की धार से भगवान कृष्ण की उंगली कट गई और खून बहने लगा। पास में ही द्रौपदी थीं, उन्होंने तुरंत अपनी साड़ी का पल्लू फाड़ा और कान्हा की उंगली पर पट्टी बांध दी।
कृष्ण जी द्रौपदी के इस प्रेम से बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने कहा - 'सखी, आज तुमने मेरी रक्षा की है। मैं वचन देता हूं, जब भी तुम्हें मेरी जरूरत होगी, मैं तुम्हारी रक्षा करूंगा।' और हुआ भी यही, सालों बाद जब दुशासन ने भरी सभा में द्रौपदी का चीर हरण करने की कोशिश की, तब कृष्ण ने ही उनकी लाज बचाई। उसी दिन से "धागे के बदले रक्षा" का ये बंधन रक्षाबंधन के रूप में मनाया जाने लगा।
अगर नहीं है कोई भाई-बहन कैसे मनाएं रक्षाबंधन?
मुंहबोले भाई-बहन को बांधें राखी
हमारे शास्त्रों में मुंहबोले रिश्ते को भी सगे जैसा ही माना गया है। ऐसे में आप अपने चचेरे भाई, पड़ोस की बहन, बचपन की दोस्त या ऑफिस की किसी बहन जैसी दोस्त से राखी बंधवा सकते हैं।
भगवान को बांधें राखी
बहुत से लोग जिनका भाई नहीं होता वो भगवान श्रीकृष्ण, हनुमान जी या पीपल के पेड़ को राखी बांधते हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान स्वयं उनकी रक्षा करते हैं। कान्हा जी को राखी बांधना सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है।
प्रकृति और गौ माता से करें रक्षा बंधन
इस दिन कई लोग गाय, पीपल, बरगद के पेड़ को रक्षा सूत्र बांधते हैं। ये हमें जीवन देते हैं, तो इनकी रक्षा का संकल्प लेना भी रक्षाबंधन ही है।
आत्म-रक्षाबंधन
अगर कोई भी नहीं है तो खुद को राखी बांधें। खुद से वादा करें कि आप खुद की रक्षा करेंगे, खुद को आगे बढ़ाएंगे और कभी गलत रास्ते पर नहीं जाएंगे। रक्षाबंधन का असली मतलब है रक्षा का बंधन। ये धागा प्यार, विश्वास और जिम्मेदारी का है, जो किसी को भी बांधा जा सकता है।
रक्षाबंधन की तिलक विधि
स्नान और तैयारी - सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। पूजा की थाली में राखी, अक्षत, रोली, दीप, मिठाई और जल रखें।
तिलक लगाएं - भाई को आसन पर बिठाएं। पहले रोली का तिलक लगाएं और अक्षत लगाएं।
राखी बांधें - भाई के दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांधें। राखी बांधते समय "येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वाम् अभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥" मंत्र पढ़ें।
आरती और मिठाई - दीप से भाई की आरती उतारें। मिठाई खिलाएं और जल पिलाएं।
भाई का वचन - भाई बहन को उपहार देते हैं और उसकी रक्षा का वचन लेते हैं।
चंद्रमा को अर्घ्य - इस दिन शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देना भी शुभ माना जाता है।
रक्षाबंधन का महत्व
यह त्योहार सिर्फ भाई-बहन का नहीं है, बल्कि रक्षा बंधन का मतलब है रक्षा का बंधन। यह हमें परिवार, समाज और देश की रक्षा के लिए भी प्रेरित करता है। भगवान कृष्ण और द्रौपदी, राजा बली और देवी लक्ष्मी की कथा भी इसी दिन से जुड़ी है।