
सनातन धर्म में रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प का प्रतीक माना गया है। इस साल यह पावन पर्व 28 अगस्त को सावन माह की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि पर बेहद शुभ योग में मनाया जाएगा। इस शुभ दिन पर बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और जीवन में खुशहाली की कामना करती हैं और उनकी दाहिनी कलाई पर रक्षासूत्र या राखी बांधती हैं। आज के दौर में तरह-तरह की राखियां मिलती हैं, लेकिन धार्मिक दृष्टिकोण से हर सामग्री का अपना एक विशेष महत्व होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि धर्म और शास्त्र की नजर से कौन सी राखी भाई के लिए सबसे मंगलकारी मानी गई है?
रक्षासूत्र की राखी
वैदिक परंपरा में मौली यानी कलावा को सबसे पवित्र रक्षासूत्र माना गया है। मौली में मुख्य रूप से तीन रंग (लाल, पीला और हरा) होते हैं, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतिनिधित्व करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, जब देवी लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षासूत्र बांधा था, तो वह मौली का ही धागा था।
लाभ
कहते हैं कि कलाई पर मौली बांधने से भाई को त्रिदेवों के साथ-साथ तीनों देवियों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। यह राखी सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और भाई को हर तरह की बुरी नजर से बचाती है। अगर आप वैदिक नियम से रक्षाबंधन मनाना चाहती हैं, तो मौली की राखी बांधे।
रुद्राक्ष की राखी
रुद्राक्ष को भगवान शिव का साक्षात अश्रु माना गया है। सनातन धर्म में रुद्राक्ष धारण करना बेहद पवित्र और कल्याणकारी माना जाता है। अगर आपके भाई के जीवन में मानसिक तनाव, सेहत से जुड़ी समस्याएं बनी रहती हैं, तो रुद्राक्ष की राखी बांधना बेहद फलदायी होता है।
लाभ
रुद्राक्ष की राखी भाई के आसपास एक मजबूत आध्यात्मिक सुरक्षा कवच बनाती है। इससे भाई का मन शांत रहता है, अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और जीवन में नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं कर पाती। यह राखी भाई को आरोग्य, लंबी उम्र और मानसिक शक्ति प्रदान करती है।
चांदी की राखी
ज्योतिष शास्त्र में चांदी को एक पवित्र धातु माना गया है। चांदी का संबंध चंद्रमा ग्रह से है, जो भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान हैं। चांदी धातु में शुद्धता और पवित्रता का वास होता है। चांदी की राखी न केवल दिखने में सुंदर होती है, बल्कि इसका धार्मिक प्रभाव भी बहुत गहरा होता है।
लाभ
तांबे की राखी
ज्योतिष में तांबे का संबंध सूर्य देव से माना गया है। सूर्य को आरोग्य, मान-सम्मान और आत्मविश्वास का कारक माना जाता है। यह एक शुद्ध और ऊर्जावान धातु है। अगर भाई की कुंडली में सूर्य कमजोर हो या उसे बार-बार सेहत से जुड़ी दिक्कतें हो रही हैं, तो तांबे की राखी या तांबे से बने प्रतीक वाली राखी बांधना बेहद शुभ माना जाता है।
लाभ
यह शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और समाज में मान-सम्मान व पद-प्रतिष्ठा दिलाती है।
स्वास्तिक की राखी
स्वास्तिक सनातन धर्म का सबसे पवित्र और मंगलकारी प्रतीक चिन्ह माना जाता है। स्वास्तिक का मतलब ही होता है 'कल्याण करने वाला'। स्वास्तिक में साक्षात भगवान गणेश और माता लक्ष्मी का वास माना गया है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत स्वास्तिक बनाकर ही की जाती है।
लाभ
स्वास्तिक वाली राखी भाई की कलाई पर बांधने से उसके जीवन से सभी विघ्न, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। इसके साथ ही यह कार्यक्षेत्र में आ रही मुश्किलों को खत्म कर सफलता और शुभता देता है।
सोने की राखी
ज्योतिष शास्त्र में सोने को सबसे पवित्र धातु माना गया है। सोने का संबंध देवगुरु बृहस्पति और धन की देवी मां लक्ष्मी से है। गुरु ग्रह ज्ञान, भाग्य, वृद्धि और समृद्धि के कारक हैं। सोने में पवित्रता और स्थायित्व का भाव होता है।
लाभ
माना जाता है कि सोने की राखी बांधने से भाग्य मजबूत होता है और गुरु ग्रह के शुभ फल मिलते हैं। साथ ही इससे जीवन में धन-वैभव, ऐश्वर्य और ज्ञान की वृद्धि होती है।
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