
सनातन धर्म में रक्षाबंधन का पर्व केवल एक रेशमी धागा बांधने का पर्व नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के पवित्र प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक है। इस साल रक्षाबंधन का यह पावन पर्व सावन महीने की पूर्णिमा तिथि यानी 28 अगस्त को मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने से पहले पूजा की थाली को सही सामग्री से सजाना बहुत महत्वपूर्ण है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर राखी की थाली में शास्त्रों में बताई गई 7 शुभ चीजें शामिल हों, तो इससे भाई के जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। आइए जानते हैं कि रक्षाबंधन की पूजा थाली में कौन सी 7 चीजें जरूर होनी चाहिए और उनका क्या धार्मिक महत्व है?
राखी बांधने से पहले भाई के माथे पर तिलक लगाने की परंपरा है। इसके लिए थाली में रोली या लाल सिंदूर जरूर रखें। लाल रंग सूर्य ग्रह का प्रतीक है, जो व्यक्ति को तेज, ऊर्जा, आत्मविश्वास और आरोग्य प्रदान करता है। माथे पर रोली का तिलक लगाने से भाई को जीवन के हर क्षेत्र में विजय प्राप्त होती है।
तिलक के ऊपर अक्षत लगाया जाता है। शास्त्रों में अक्षत का मतलब है, जो पूर्ण हो। थाली में हमेशा बिना टूटे हुए चावल ही रखें। तिलक पर अक्षत लगाने की धार्मिक वजह यह है कि भाई के जीवन में सुख-समृद्धि, धन और मान-सम्मान की कभी कमी न हो और उसका भाग्य सदा चमकता रहे।
राखी की थाली में एक जलता हुआ देसी घी का दीपक जरूर रखें। राखी बांधने के बाद बहन अपने भाई की आरती उतारती है। आरती करने से भाई के आसपास की सभी नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती हैं। वहीं, दीपक की लौ इस बात का प्रतीक है कि भाई का जीवन हमेशा ज्ञान, सफलता और सकारात्मकता से भरा रहे।
तिलक करने और राखी बांधने के बाद भाई का मुंह मीठा कराया जाता है। थाली में शुद्ध मिठाई, जैसे ताजी मिठाई या घर की बनी खीर रखें। धार्मिक दृष्टि से मुंह मीठा कराने का मतलब है कि भाई-बहन के रिश्ते में जीवनभर मिठास बनी रहे और वाणी में मधुरता का वास हो।
शास्त्रों में नारियल को 'श्रीफल' कहा गया है, जो धन की देवी मां लक्ष्मी और शुभता का प्रतीक है। थाली में एक साबुत पानी वाला नारियल जरूर रखें और राखी बांधते समय भाई को दें। इससे भाई के जीवन में धन-धान्य की वृद्धि होती है और आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं।
थाली में एक छोटे कलश में गंगाजल या शुद्ध जल जरूर रखें। पूजन की सामग्री को पवित्र करने और तिलक लगाने से पहले हाथ धोने के लिए जल का उपयोग किया जाता है। गंगाजल मन को शांति देता है और आध्यात्मिक रूप से शुद्ध बनाता है।
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