Logo

Rudraksha & Jalabhishek Benefits: श्रावण मास में रुद्राक्ष और जलाभिषेक का महत्व, जानिए सही विधि और मंत्र

Devanand sharmaDevanand sharmaUpdated 03 Aug 2026 02:10 PM IST
Rudraksha & Jalabhishek Benefits: श्रावण मास में रुद्राक्ष और जलाभिषेक का महत्व, जानिए सही विधि और मंत्र

Special Things

Rudraksha and Jalabhishek Benefits During Sawan Month:सावन में रुद्राक्ष धारण और शिवलिंग पर जलाभिषेक का धार्मिक महत्व, सही विधि, शुभ मंत्र, रुद्राक्ष के प्रकार और भगवान शिव की कृपा पाने के आसान उपाय जानें। 

Rudraksha & Jalabhishek Benefits: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। श्रावण मास में श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई शिव उपासना से भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं। यही कारण है कि इस महीने रुद्राक्ष धारण करने और शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का विशेष महत्व बताया गया है। शिवपुराण, लिंगपुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में इन दोनों का उल्लेख शिव भक्ति के महत्वपूर्ण अंग के रूप में मिलता है। आइए सबसे पहले जानते हैं कि सावन में रुद्राक्ष धारण करना क्यों शुभ माना जाता है।


सावन में रुद्राक्ष धारण का महत्व

रुद्राक्ष को भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है। रुद्राक्ष' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है— रुद्र और अक्ष। यहां 'रुद्र' भगवान शिव का नाम है और 'अक्ष' का अर्थ है आंख या अश्रु। अर्थात रुद्राक्ष का अर्थ है भगवान रुद्र की आंखों से निकला अश्रु। यही कारण है कि इसे शिव का अत्यंत प्रिय माना गया है। यह शिव भक्तों के लिए अत्यंत पूजनीय माना जाता है। प्राचीन काल से ऋषि, मुनि, योगी और शिव साधक रुद्राक्ष धारण करते आए हैं। यह केवल एक माला या बीज नहीं, बल्कि भक्ति, साधना और आत्मसंयम का प्रतीक माना जाता है।
सावन के महीने में रुद्राक्ष धारण करने का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि यह समय भगवान शिव की विशेष आराधना का माना गया है। इस महीने विधि-विधान से धारण किया गया रुद्राक्ष भक्त को भगवान शिव के स्मरण से जोड़े रखता है और उसके मन में भक्ति का भाव प्रबल करता है। रुद्राक्ष धारण करने के साथ यदि व्यक्ति सात्विक जीवन अपनाए, सत्य का पालन करे और नियमित रूप से शिव मंत्रों का जप करे, तो उसकी साधना अधिक फलदायी मानी जाती है।
रुद्राक्ष धारण करने से पहले उसे गंगाजल या स्वच्छ जल से शुद्ध कर लें। इसके बाद भगवान शिव के समक्ष धूप-दीप अर्पित कर रुद्राक्ष पूजा में स्थापित कर दें। सोमवार या सावन सोमवार को रुद्राक्ष धारण करना विशेष शुभ माना गया है। धारण करते समय भगवान शिव का ध्यान करते हुए पंचाक्षरी मंत्र "ॐ नमः शिवाय" का 108 बार जप करना उत्तम माना जाता है।

रुद्राक्ष धारण करते समय महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी अत्यंत शुभ माना गया है—
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥


यह मंत्र भगवान शिव की आराधना का प्रमुख मंत्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसका श्रद्धापूर्वक जप करने से मन को शांति मिलती है और साधक का आत्मबल बढ़ता है।

रुद्राक्ष धारण करने के बाद उसकी पवित्रता बनाए रखना भी आवश्यक माना गया है। इसे सम्मानपूर्वक धारण करें, नियमित रूप से शिव मंत्रों का जप करें और सात्विक आचरण अपनाएं। 


सावन में कौन-सा रुद्राक्ष धारण करें?

एकमुखी – शिव स्वरूप (दुर्लभ)
पंचमुखी – सबसे अधिक प्रचलित, सामान्य लोगों के लिए उपयुक्त माना जाता है।
छहमुखी – ज्ञान और आत्मविश्वास का प्रतीक।
सातमुखी – माता लक्ष्मी से संबंधित माना जाता है।
ग्यारहमुखी – रुद्र स्वरूप माना जाता है।

सावन में जलाभिषेक का धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब हलाहल विष निकला, तब संपूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष का पान कर लिया। विष के प्रभाव से उनके शरीर में तीव्र उष्णता उत्पन्न हुई। तब सभी देवी-देवताओं ने भगवान शिव पर गंगाजल और शीतल जल अर्पित किया, जिससे उन्हें शांति मिली। इसी घटना के स्मरण में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा प्रारंभ हुई। यही कारण है कि सावन के महीने में जलाभिषेक का विशेष महत्व बताया गया है।
शिवपुराण में भी उल्लेख मिलता है कि भगवान शिव सरल उपासना से प्रसन्न होने वाले देव हैं। उन्हें स्वर्ण, रत्न या वैभव की अपेक्षा श्रद्धा और निर्मल भाव अधिक प्रिय है। इसलिए केवल स्वच्छ जल से भी श्रद्धापूर्वक किया गया अभिषेक अत्यंत फलदायी माना गया है। धार्मिक विश्वास है कि जलाभिषेक करने से मन में शांति आती है, भगवान शिव के प्रति भक्ति बढ़ती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।

जलाभिषेक की सही विधि

जलाभिषेक के लिए प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय के बाद स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थान या शिव मंदिर में भगवान शिव का ध्यान करें। तांबे के लोटे में स्वच्छ जल या गंगाजल लें। यदि संभव हो तो उसमें कुछ बूंदें गंगाजल की मिलाई जा सकती हैं। जल अर्पित करते समय उसे धीरे-धीरे शिवलिंग पर प्रवाहित करें और मन में भगवान शिव का ध्यान बनाए रखें। जलाभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, सफेद चंदन, भस्म, धतूरा, भांग, आक के पुष्प, सफेद पुष्प और मौसमी फल अर्पित किए जा सकते हैं। बेलपत्र अर्पित करते समय यह ध्यान रखें कि उसकी तीनों पत्तियां जुड़ी हुई हों और वह खंडित न हो। परंपरा के अनुसार भगवान शिव को केतकी और सामान्यतः लाल फूल अर्पित नहीं किए जाते।

जलाभिषेक करते समय भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र ॐ नमः शिवाय॥ सबसे अधिक प्रचलित और प्रभावशाली माना जाता है, इस मंत्र का जितना अधिक श्रद्धापूर्वक जाप किया जाए, उतना ही शुभ माना गया है। यदि संभव हो तो 108 बार जप करना उत्तम माना जाता है।

महामृत्युंजय मंत्र का जाप जलाभिषेक के समय विशेष रूप से किया जाता है, धार्मिक मान्यता के अनुसार यह मंत्र भगवान शिव की कृपा, आरोग्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की कामना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है—

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥


भगवान शिव की आराधना में शिव गायत्री मंत्र का भी विशेष स्थान है—

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥


यदि गंगाजल से अभिषेक कर रहे हों, तो जल अर्पित करने से पहले यह मंत्र भी बोला जा सकता है—

गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥

जलाभिषेक करते समय किन बातों का ध्यान रखें?

जलाभिषेक सदैव स्वच्छ मन और श्रद्धा के साथ करना चाहिए। शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय जल्दबाजी न करें और मन को भगवान शिव के ध्यान में लगाएं। पूजा के दौरान सात्विकता बनाए रखें तथा क्रोध, अहंकार और कटु वाणी से बचने का प्रयास करें। धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान शिव को अर्पित बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री ताजी एवं स्वच्छ होनी चाहिए।
सावन में शिवलिंग पर जलाभिषेक करना भगवान शिव की आराधना का सबसे सरल और महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और विधि-विधान के साथ किया गया जलाभिषेक भगवान शिव को प्रसन्न करता है और साधक के मन में शांति, सकारात्मकता तथा आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है। 
सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना का सबसे प्रमुख अनुष्ठान शिवलिंग पर जलाभिषेक माना जाता है। 'जलाभिषेक' का अर्थ है श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान शिव पर पवित्र जल अर्पित करना। सनातन परंपरा में यह केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति समर्पण, आस्था और कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम भी माना गया है।

सावन में विधिपूर्वक किया गया जलाभिषेक और विधि विधान से रुद्राक्ष धारण करना  भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है और और भक्त को उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है।

Related Puja

पितृ पक्ष पूजा - 16 तिथि पितृ शांति महापूजा, तिल तर्पण और पिंड अर्पण
Pitru Shanti • Pitru Tripti • Family Prosperity • Ancestral Blessings

पितृ पक्ष पूजा - 16 तिथि पितृ शांति महापूजा, तिल तर्पण और पिंड अर्पण

Sat 26 September 2026
Gaya Tirth Kshetra, Bihar
193 devotees have booked this puja
Book Puja
पितृ पक्ष पूजा - 16 तिथि पितृ शांति महापूजा, तिल तर्पण और पिंड अर्पण
Pitru Shanti • Pitru Tripti • Family Prosperity • Ancestral Blessings

पितृ पक्ष पूजा - 16 तिथि पितृ शांति महापूजा, तिल तर्पण और पिंड अर्पण

Sat 26 September 2026
Gaya Tirth Kshetra, Bihar
193 devotees have booked this puja
Book Puja

Talk to Astrologer

View all

Connect with India's best astrologers

टैरो प्रीति

टैरो प्रीति

26/min₹5/min
टैरो रोमी

टैरो रोमी

26/min₹5/min
एस्ट्रो एस तिवारी

एस्ट्रो एस तिवारी

20/min₹5/min
टैरो बीना जी

टैरो बीना जी

32/min₹5/min
बालकेश

बालकेश

28/min₹5/min
View all
पितृ पक्ष पूजा - 16 तिथि पितृ शांति महापूजा, तिल तर्पण और पिंड अर्पण
Pitru Shanti • Pitru Tripti • Family Prosperity • Ancestral Blessings

पितृ पक्ष पूजा - 16 तिथि पितृ शांति महापूजा, तिल तर्पण और पिंड अर्पण

Sat 26 September 2026
Gaya Tirth Kshetra, Bihar
193 devotees have booked this puja
Book Puja
पितृ पक्ष पूजा - 16 तिथि पितृ ऋण मुक्ति महापूजा, तिल तर्पण और गौ सेवा
For the peace of known and unknown ancestors and for liberation from ancestral debt.

पितृ पक्ष पूजा - 16 तिथि पितृ ऋण मुक्ति महापूजा, तिल तर्पण और गौ सेवा

Sat 26 September 2026
Pishach Mochan Kund, Kashi
150 devotees have booked this puja
Book Puja
पूर्णिमा श्राद्ध पर पितृ शांति एवं तर्पण अनुष्ठान
Pitru Tripti & Family Prosperity Special Ritual

पूर्णिमा श्राद्ध पर पितृ शांति एवं तर्पण अनुष्ठान

Sat 26 September 2026
Har ki Pauri, Haridwar
300 devotees have booked this puja
Book Puja

Reconnect with your Faith

UserUserUser
Trusted by 1 Lakh Devotees
100% Secure