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Sawan 2026: सावन में राशि अनुसार करें शिव पूजन, जानें मेष से मीन तक सही पूजा विधि

Devanand sharmaDevanand sharmaUpdated 04 Aug 2026 02:31 PM IST
Sawan 2026: सावन में राशि अनुसार करें शिव पूजन, जानें मेष से मीन तक सही पूजा विधि

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Sawan 2026: सावन 2026 में राशि अनुसार भगवान शिव की पूजा कैसे करें? जानें मेष से मीन तक सभी राशियों के लिए शिव पूजा विधि, मंत्र, अभिषेक, दान और विशेष उपाय।
Sawan Rashi Anusar Shiv Puja: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस महीने श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई शिव पूजा से भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार प्रत्येक राशि का स्वामी ग्रह अलग होता है और उसी के अनुरूप पूजा करने से ग्रहों की शुभता बढ़ने तथा जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की मान्यता है। आइए जानते हैं मेष से कर्क राशि तक के जातकों को सावन में भगवान शिव की पूजा किस प्रकार करनी चाहिए।

सावन 2026 में राशिनुसार उपाय (Sawan Rashi Anusar Shiv Puja)

मेष राशि

मेष राशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार सावन का महीना मेष राशि के जातकों के लिए भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का उत्तम समय माना जाता है। यदि इस राशि के लोग सावन के प्रत्येक सोमवार या पूरे महीने नियमित रूप से भगवान शिव का गंगाजल, शुद्ध जल और कच्चे दूध से अभिषेक करें तथा बेलपत्र, धतूरा, भांग और सफेद चंदन अर्पित करें, तो मंगल ग्रह से जुड़े अशुभ प्रभाव कम होने की मान्यता है। पूजा के समय भगवान शिव के समक्ष घी का दीपक जलाएं और पूरे श्रद्धाभाव से अपनी मनोकामना व्यक्त करें। ऐसा माना जाता है कि इससे साहस, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है तथा कार्यों में आने वाली बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।
पूजा के बाद "ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। सावन के किसी भी सोमवार मसूर की दाल और गुड़ का दान करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव की कृपा से करियर में सफलता, शत्रुओं पर विजय, क्रोध पर नियंत्रण और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।

वृषभ राशि

वृषभ राशि के स्वामी शुक्र ग्रह हैं। यह राशि सुख, समृद्धि, सौंदर्य और भौतिक सुविधाओं का प्रतिनिधित्व करती है। सावन के महीने में वृषभ राशि के जातकों को सुबह स्नान करने के बाद भगवान शिव का गंगाजल, कच्चे दूध और शुद्ध जल से अभिषेक करना चाहिए। इसके बाद बेलपत्र, सफेद चंदन, सफेद पुष्प और मिश्री अर्पित करें। धार्मिक मान्यता है कि इस प्रकार पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और शुक्र ग्रह से संबंधित परेशानियां कम होने लगती हैं। यदि संभव हो तो प्रत्येक शुक्रवार और सोमवार शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें।
पूजा के दौरान "ॐ वामदेवाय नमः॥" मंत्र का 108 बार जाप करें। सावन में सफेद वस्त्र, चावल या चीनी का दान करना भी वृषभ राशि वालों के लिए शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है, घर में सुख-शांति बनी रहती है और मन की अशांति दूर होने लगती है।

मिथुन राशि

मिथुन राशि के स्वामी बुध ग्रह हैं। बुध को बुद्धि, वाणी, व्यापार और शिक्षा का कारक माना जाता है। यदि मिथुन राशि के जातक सावन के महीने में प्रतिदिन भगवान शिव का गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें तथा बेलपत्र, चंदन और मौसमी फल अर्पित करें, तो बुध ग्रह की शुभता बढ़ने की मान्यता है। पूजा के समय कुछ देर शांत बैठकर भगवान शिव का ध्यान करें और अपने मन को एकाग्र रखें। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से मानसिक भ्रम कम होता है, निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और व्यापार तथा शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम मिलने लगते हैं।
अभिषेक के बाद "ॐ ईशानाय नमः॥" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। बुधवार के दिन हरी मूंग, हरी सब्जियों या पढ़ाई से जुड़ी सामग्री का दान करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव की कृपा से वाणी में मधुरता आती है, व्यापार में नए अवसर प्राप्त होते हैं और विद्यार्थियों को पढ़ाई में बेहतर सफलता मिल सकती है।

कर्क राशि

कर्क राशि के स्वामी चंद्र देव हैं। भगवान शिव को चंद्रशेखर भी कहा जाता है, इसलिए कर्क राशि के जातकों के लिए सावन का महीना विशेष महत्व रखता है। इस राशि के लोगों को प्रातःकाल भगवान शिव का गंगाजल, शुद्ध जल और कच्चे दूध से अभिषेक करना चाहिए। इसके बाद सफेद चंदन, सफेद पुष्प और बेलपत्र अर्पित कर शांत मन से भगवान शिव का ध्यान करें। धार्मिक मान्यता है कि इस प्रकार पूजा करने से चंद्र ग्रह मजबूत होता है और मानसिक तनाव, चिंता तथा अस्थिरता में कमी आने लगती है। यदि संभव हो तो सावन के प्रत्येक सोमवार शिव चालीसा का पाठ भी करें।
पूजा के बाद "ॐ सोमेश्वराय नमः॥" मंत्र का 108 बार जाप करें। सावन में दूध, चावल या खीर का दान करना कर्क राशि वालों के लिए शुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है, माता का सहयोग मिलता है, मन प्रसन्न रहता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

सिंह राशि

सिंह राशि के स्वामी सूर्य देव हैं। वैदिक ज्योतिष में सूर्य को आत्मबल, मान-सम्मान, नेतृत्व और प्रतिष्ठा का कारक माना जाता है। यदि सिंह राशि के जातक सावन के महीने में नियमित रूप से भगवान शिव की आराधना करें, तो उन्हें विशेष शुभ फल मिलने की मान्यता है। सुबह स्नान करने के बाद शिवलिंग पर गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें। इसके बाद यदि उपलब्ध हो तो थोड़ी मात्रा में केसर मिश्रित जल अर्पित करें और बेलपत्र, धतूरा, भस्म तथा सफेद चंदन चढ़ाएं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव की कृपा से सूर्य ग्रह की शुभता बढ़ती है, आत्मविश्वास मजबूत होता है और कार्यक्षेत्र में सम्मान प्राप्त होता है। सावन के प्रत्येक रविवार या सोमवार शिव मंदिर में दीपक जलाकर भगवान भोलेनाथ का ध्यान करना भी शुभ माना जाता है।
पूजा के बाद "ॐ नमो भगवते रुद्राय॥" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। इसके साथ ही गेहूं, गुड़ या तांबे की वस्तु का दान करना भी शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस उपाय से सरकारी कार्यों में आ रही रुकावटें दूर होती हैं, नेतृत्व क्षमता बढ़ती है और समाज में मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।

कन्या राशि

कन्या राशि के स्वामी बुध ग्रह हैं। यह राशि बुद्धिमत्ता, तर्क, सेवा और कार्यकुशलता का प्रतीक मानी जाती है। सावन के महीने में कन्या राशि के जातकों को भगवान शिव का गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करना चाहिए। इसके बाद बेलपत्र, सफेद चंदन, भस्म और मौसमी फल अर्पित करें। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और बुध ग्रह के शुभ प्रभाव में वृद्धि होती है। यदि नौकरी, प्रतियोगी परीक्षा या व्यापार में किसी प्रकार की बाधा आ रही हो तो सावन के प्रत्येक बुधवार शिव मंदिर जाकर भगवान शिव का ध्यान करना विशेष लाभकारी माना जाता है।
अभिषेक के बाद "ॐ शर्वाय नमः॥" मंत्र का 108 बार जाप करें। हरी मूंग, हरा चारा या जरूरतमंद विद्यार्थियों को पुस्तकें दान करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे बुद्धि तेज होती है, कार्यों में सफलता मिलने लगती है और आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे मजबूत होने लगती है।


तुला राशि

तुला राशि के स्वामी शुक्र ग्रह हैं। शुक्र को सुख, प्रेम, सौंदर्य, कला और वैवाहिक जीवन का कारक माना जाता है। सावन के महीने में तुला राशि के लोगों को भगवान शिव का गंगाजल, शुद्ध जल और कच्चे दूध से अभिषेक करना चाहिए। इसके बाद सफेद पुष्प, बेलपत्र, चंदन और यदि संभव हो तो थोड़ा इत्र अर्पित करें। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव की कृपा से शुक्र ग्रह के अशुभ प्रभाव कम होने लगते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। सावन के सोमवार को शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा करना भी तुला राशि वालों के लिए शुभ माना गया है।
पूजा के बाद "ॐ महेश्वराय नमः॥" मंत्र का 108 बार जाप करें। सफेद मिठाई, चावल या सुगंधित वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है, आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं। यह राशि साहस, रहस्य, शोध और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक मानी जाती है। यदि वृश्चिक राशि के जातक सावन के महीने में भगवान शिव की नियमित पूजा करें, तो उन्हें विशेष आध्यात्मिक और मानसिक लाभ मिलने की मान्यता है। सुबह स्नान करने के बाद शिवलिंग पर गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें। इसके बाद जल में काले तिल मिलाकर अर्पित करें तथा बेलपत्र, धतूरा, भस्म और सफेद चंदन चढ़ाएं। धार्मिक मान्यता है कि इस पूजा से मंगल ग्रह की शुभता बढ़ती है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और साहस में वृद्धि होती है। यदि जीवन में बार-बार बाधाएं आ रही हों तो सावन के प्रत्येक सोमवार भगवान शिव के सामने दीपक जलाकर कुछ समय तक ध्यान अवश्य करें।
पूजा के बाद "ॐ त्र्यम्बकाय नमः॥" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। मसूर की दाल, गुड़ या लाल फल का दान करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से शत्रु बाधा कम होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है, स्वास्थ्य में सुधार होता है और जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।

धनु राशि

धनु राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, भाग्य, संतान और गुरु का कारक माना गया है। सावन का महीना धनु राशि के जातकों के लिए भगवान शिव की आराधना कर आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। इस राशि के लोगों को प्रातः स्नान के बाद भगवान शिव का गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करना चाहिए। इसके बाद कच्चा दूध, बेलपत्र, सफेद चंदन और मौसमी फल अर्पित करें। धार्मिक मान्यता है कि इस प्रकार श्रद्धा से पूजा करने पर बृहस्पति की शुभता बढ़ती है, भाग्य का साथ मिलने लगता है और शिक्षा, करियर तथा पारिवारिक जीवन में अनुकूल परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। यदि संभव हो तो सावन के प्रत्येक गुरुवार शिव मंदिर में पीले फल या केले का दान भी करें।
पूजा के बाद "ॐ शूलपाणये नमः॥" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। इसके साथ ही पीली दाल, हल्दी या पीले वस्त्र का दान करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से ज्ञान में वृद्धि होती है, रुके हुए कार्य पूरे होने लगते हैं, संतान पक्ष से सुखद समाचार मिल सकते हैं और आर्थिक स्थिति में भी सुधार आने लगता है।

मकर राशि

मकर राशि के स्वामी शनि देव हैं। शनि को कर्म, न्याय, अनुशासन और परिश्रम का ग्रह माना जाता है। यदि मकर राशि के जातक सावन के महीने में भगवान शिव की नियमित पूजा करें, तो उन्हें शनि से जुड़े कष्टों में राहत मिलने की मान्यता है। सुबह भगवान शिव का गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें। इसके बाद जल में काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें तथा बेलपत्र, भस्म और सफेद चंदन चढ़ाएं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव की कृपा से कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है और कर्मों का शुभ फल प्राप्त होने लगता है। सावन के प्रत्येक शनिवार या सोमवार शिव मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।
पूजा के बाद "ॐ नीलकण्ठाय नमः॥" मंत्र का 108 बार जाप करें। काले तिल, उड़द की दाल या जरूरतमंद लोगों को कंबल दान करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे कार्यक्षेत्र की बाधाएं कम होती हैं, मानसिक तनाव घटता है और मेहनत का उचित फल मिलने लगता है।

कुंभ राशि

कुंभ राशि के स्वामी भी शनि देव हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंभ राशि के जातकों के लिए सावन में भगवान शिव की आराधना विशेष फलदायी मानी गई है। इस राशि के लोगों को प्रतिदिन या कम से कम सोमवार के दिन शिवलिंग पर गंगाजल, शुद्ध जल और कच्चे दूध से अभिषेक करना चाहिए। इसके बाद बेलपत्र, भस्म और सफेद चंदन अर्पित करें। धार्मिक मान्यता है कि इस पूजा से शनि के अशुभ प्रभाव कम होने लगते हैं और जीवन में स्थिरता, धैर्य तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यदि लंबे समय से कोई काम अटका हुआ हो तो सावन के दौरान नियमित रूप से शिव मंदिर जाकर भगवान भोलेनाथ का ध्यान करना लाभकारी माना जाता है।
पूजा के बाद "ॐ पशुपतये नमः॥" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। जरूरतमंद लोगों को काले तिल, जूते-चप्पल या भोजन का दान करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे करियर में उन्नति, आर्थिक स्थिरता और मानसिक शांति प्राप्त होती है तथा जीवन की परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।

मीन राशि

मीन राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। यह राशि आध्यात्मिकता, दया, ज्ञान और धार्मिक कार्यों से जुड़ी मानी जाती है। सावन के महीने में मीन राशि के जातकों को भगवान शिव का गंगाजल, शुद्ध जल और कच्चे दूध से अभिषेक करना चाहिए। इसके बाद बेलपत्र, सफेद चंदन, सफेद पुष्प और मौसमी फल अर्पित करें। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव की कृपा से बृहस्पति मजबूत होता है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। यदि संभव हो तो सावन के प्रत्येक सोमवार शिव चालीसा या रुद्राष्टकम का पाठ भी करें।
पूजा के बाद "ॐ सदाशिवाय नमः॥" मंत्र का 108 बार जाप करें। पीली मिठाई, चने की दाल या धार्मिक पुस्तकों का दान करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे आध्यात्मिक उन्नति होती है, परिवार में सुख-शांति बनी रहती है, आर्थिक परेशानियां कम होती हैं और भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है। 

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