
हिंधू धर्म में सावन माह का विशेष महत्व है। सावन का महीना आते ही चारों तरफ हरियाली छा जाती है। इस महीने में महिलाएं हरी चूड़ियां, हरी साड़ी और मेहंदी लगाती हैं। लेकिन क्या आपने सोचा है कि सावन में ही हरे रंग को इतना महत्व क्यों दिया जाता है? इसके पीछे सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि गहरी धार्मिक, पौराणिक और वैज्ञानिक वजहें हैं। आइए उनके बारे में जानते हैं।
सावन में मनाई जाने वाली हरियाली तीज इसी का उदाहरण है। कहते हैं इसी दिन भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। उस दिन चारों तरफ हरियाली थी। तभी से इस दिन झूले झूलने, गीत गाने और हरा पहनने की परंपरा शुरू हुई। हरा रंग नई शुरुआत, समृद्ध जीवन का प्रतीक माना जाता है।
सावन बरसात का महीना है। इस मौसम में बैक्टीरिया और संक्रमण बढ़ जाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार हरा रंग आंखों को ठंडक देता है और दिमाग को शांति। पुराने समय में हरी चूड़ियां कांच की बनती थीं, जो नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती थीं। साथ ही सावन में प्रकृति खुद हरी हो जाती है। इसलिए इंसान भी प्रकृति से जुड़कर इस रंग को अपनाता है। इससे मन में सकारात्मकता आती है। इसके साथ ही यह प्रेम, करुणा और संतुलन को बढ़ाता है।
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