Sharad Purnima 2026 Kheer Time And Niyam: आज शरद पूर्णिमा मनाई जा रही है। आइए यहां आसमान के नीचे खीर रखने का सही समय, पूजा के नियम जानते हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन महीने की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा या कोजागर पूर्णिमा कहा जाता है। सालभर की सभी पूर्णिमाओं में शरद पूर्णिमा का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस खास रात को आसमान से अमृत की वर्षा होती है। यही वजह है कि इस रात को खुले आसमान के नीचे चांदी या मिट्टी के बर्तन में दूध-चावल की खीर बनाकर रखी जाती है, ताकि उस पर चंद्रमा की पवित्र किरणें पड़ सकें। कहते हैं कि इस प्रसाद को खाने से सालभर अच्छी सेहत और मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है। आइए जानते हैं कि शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima 2026) पर खीर रखने का सही समय और नियम क्या हैं?
शरद पूर्णिमा पर खीर रखने का सही समय (Sharad Purnima 2026 Kheer Timing)
सोलह कलाओं से पूर्ण: शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपनी पूरी सोलह कलाओं से पूर्ण होते हैं।
खीर रखने का सही समय: रात के समय जब चंद्रमा आकाश के बीचों-बीच आ जाए, तब खीर को खुले आसमान के नीचे रखना चाहिए। चंद्रोदय शाम 04 बजकर 55 मिनट से मध्यरात्रि निशीथ काल यानी रात 12 बजकर 30 मिनट तक खीर को खुली चांदनी में रखना सबसे फलदायी माना जाता है।
कब खाएं?: इस खीर को रातभर चांदनी में रखने के बाद, अगले दिन सुबह स्नान करके भगवान को भोग लगाकर परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद के रूप में खाना चाहिए।
खीर रखने और खाने के जरूरी नियम
खीर हमेशा चांदी, पीतल या साफ मिट्टी के बर्तन में बनानी और रखनी चाहिए। एल्युमिनियम या प्लास्टिक के बर्तन का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।
जब खीर को आसमान के नीचे रखें, तो उसे किसी साफ सूती महीन कपड़े या जाली से ढक दें, ताकि रात में कोई कीड़ा या धूल उसमें न गिरे।
खीर बनाते समय उसमें तुलसी का एक पवित्र पत्ता जरूर डालें, क्योंकि भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को तुलसी बेहद प्रिय है।
धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात को सोना नहीं चाहिए। इस रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और अपनी कृपा बरसाती हैं।
शरद पूर्णिमा की पौराणिक कथा (Sharad Purnima 2026 Katha)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक साहूकार की दो बेटियां थीं। दोनों बेटियां शरद पूर्णिमा का व्रत रखती थीं। बड़ी बेटी ने विधि-विधान से पूरा व्रत किया और रात्रिजागरण किया। वहीं, छोटी बेटी ने आधे-अधूरी श्रद्धा से व्रत किया और रात को सो गई। कुछ समय बाद छोटी बेटी की जितनी भी संतान हुईं, वे जन्म लेते ही मर जाती थीं। एक दिन उसने एक विद्वान पंडित से इसका कारण पूछा। पंडित ने बताया कि तुमने शरद पूर्णिमा के व्रत का अधूरा पालन किया था। छोटी बेटी को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने अपनी बड़ी बहन के साथ पूरे नियम से शरद पूर्णिमा का व्रत रखा। माता लक्ष्मी की कृपा से उसके सभी दुख दूर हो गए और उसे स्वस्थ संतान की प्राप्ति हुई। तभी से यह माना जाता है कि इस रात विधि-विधान से पूजा करने और जागने से घर में कभी धन-दौलत की कमी नहीं होती है।
शरद पूर्णिमा का महत्व (Sharad Purnima 2026 Significance)
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस रात चंद्रमा की किरणों में औषधीय गुण होते हैं। दूध और चावल में लैक्टिक एसिड और स्टार्च होता है, जो चांदनी की किरणों को सोखकर उसे अमृत के समान गुणकारी बना देता है।