Navratri Kanya Pujan Ashtami or Navami: नवरात्रि में कन्या पूजन अष्टमी या नवमी किस दिन करना चाहिए? आइए यहां इससे जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।
शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की विधिवत पूजा करने के बाद व्रती अपने व्रत का समापन करते हैं। नवरात्रि पूजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कन्या पूजन को माना जाता है, लेकिन हर साल लोगों के मन में एक बड़ा सवाल जरूर रहता है कि कन्या पूजन महाअष्टमी के दिन करना चाहिए या फिर महानवमी के दिन? आइए शास्त्रों के अनुसार सही नियम क्या है यहां जानते हैं।
कन्या पूजन अष्टमी को करें या नवमी को?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन क्षेत्र और कुल की परंपराओं पर निर्भर करता है कि आप किस दिन पूजन करते हैं:
अष्टमी तिथि पर पूजन: उत्तर भारत और कई अन्य राज्यों में महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन करने की परंपरा सबसे ज्यादा प्रचलित है। इस दिन महागौरी की पूजा होती है और कई घरों में अष्टमी के दिन ही हवन करके कन्या भोज किया जाता है।
नवमी तिथि पर पूजन: कुछ लोग नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन करना शुभ मानते हैं, क्योंकि नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है और व्रत का पूर्ण समापन हवन व कन्या पूजन के बाद ही किया जाता है।
ऐसा भी कर सकते हैं: अगर आपके घर में अष्टमी के दिन कन्या भोज करते हैं, तो अष्टमी को करें। अगर नवमी की परंपरा है, तो नवमी के दिन कन्या पूजन करें। दोनों ही तिथियां मां दुर्गा को बेहद प्रिय हैं।
कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
कन्या पूजन हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए। सुबह का समय या दोपहर का अभिजीत मुहूर्त कन्या पूजन के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इसके साथ ही राहुकाल के समय कन्या पूजन करने से बचना चाहिए।