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Varaha Jayanti 2026: 13 या 14 सितंबर कब है वराह जयंती? नोट करें तिथि, समय और पूजा विधि

Vaishnavi DwivediVaishnavi DwivediUpdated 12 Sep 2026 03:50 PM IST
Varaha Jayanti 2026: 13 या 14 सितंबर कब है वराह जयंती? नोट करें तिथि, समय और पूजा विधि

Special Things

इस साल वराह जयंती (Varaha Jayanti 2026) कब मनाई जाएगी? आइए यहां इसकी सही तिथि और समय जानते हैं।

भगवान श्री हरि विष्णु के दशावतारों का विशेष महत्व है। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान विष्णु के तीसरे अवतार वराह देव के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसे वराह जयंती कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब असुर हिरण्याक्ष ने देवी पृथ्वी को समुद्र में जाकर बंधक बना दिया था, तब भगवान विष्णु ने वराह का रूप धारण करके हिरण्याक्ष का वध किया और पृथ्वी को अपने दांतों पर उठाकर फिर से स्थापित किया था। इस साल वराह जयंती की सही तिथि को लेकर लोगों में थोड़ी कन्फ्यूजन है, तो आइए यहां पंचांग के अनुसार वराह जयंती की सही डेट जानते हैं।

कब है वराह जयंती 2026?

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह 7 बजकर 8 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर वराह जयंती 13 सितंबर, दिन रविवार को मनाई जाएगी।

वराह जयंती पूजा विधि 

  • वराह जयंती के दिन सुबह उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।  
  • घर के मंदिर की सफाई करें और एक वेदी या चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं।
  • वेदी पर भगवान विष्णु या भगवान वराह की प्रतिमा स्थापित करें। 
  • अगर वराह देव की प्रतिमा न हो, तो शालिग्राम जी की स्थापना करें।
  • गंगाजल और कच्चे दूध से अभिषेक करें। 
  • उन्हें पीले वस्त्र, पीला चंदन, रोली, अक्षत और पीले फूल अर्पित करें।  
  • भगवान वराह को तुलसी पत्र, पंचामृत, फल और पीले मिठाई का भोग लगाएं।  
  • पूजा के दौरान "ॐ नमो भगवते वराहाय नमः" या "ॐ वराहाय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें। 
  • इस दिन वराह स्तोत्र का पाठ करना बेहद फलदायी माना जाता है।
  • पूजा के अंत में भाव के साथ आरती करें। 
  • इसके बाद किसी जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र या तिल का दान करें।  

वराह जयंती का धार्मिक महत्व 

ऐसा माना जाता है कि भगवान वराह की पूजा करने से डर और किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है।  कहते हैं कि भगवान वराह ने पृथ्वी का उद्धार किया था, इसलिए इस दिन पूजा करने से जमीन, मकान से जुड़ी सभी समस्याएं दूर होती हैं। इसके साथ ही जीवन के बड़े से बड़े संकटों का अंत हो जाता है। 

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