
धनतेरस का दिन अपने आप में बेहद शुभ माना जाता है। यह दिन भगवान कुबेर और धन्वंतरि जी को समर्पित है। कहते हैं कि इस दिन पूजा-पाठ और खरीदारी करने से घर में कभी सुख-सौभाग्य की कमी नहीं होती है। साथ ही मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वहीं, इस दिन (Dhanteras 2026) धन्वंतरि पूजन का विशेष विधान है। आइए इस मान्यता के पीछे की खास वजह जानते हैं?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब समुद्र मंथन हुआ था, तब कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भगवान धन्वंतरि का प्राक्ट्य हुआ था, जिन्हें आयुर्वेद का देवता माना जाता है। इसी वजह से इस दिन को धनतेरस कहा जााता है। ऐसा कहा जाता है कि जो जातक लंबे समय से किसी बड़ी बीमारी से परेशान हैं, उन्हें भगवान धन्वंतरि की पूजा जरूर करनी चाहिए। ऐसा करने से सभी रोग-दोष का अंत होता है। साथ ही अच्छी सेहत का वरदान मिलता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
जय धन्वंतरि देवा, जय धन्वंतरि जी देवा।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।। जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।
देवासुर के संकट आकर दूर किए।। जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।
सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।। जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।। जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।। जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।
वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा।। जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे।
रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे।। जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
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