करण को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है: स्थिर करण और गतिशील करण।
स्थिर करण वे होते हैं जो चंद्रमा की गति के साथ अपनी स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं करते। ये करण सूर्य की स्थिति को दर्शाते हैं और समय के अनुसार स्थिर रहते हैं। इस प्रकार के करण का प्रभाव उन गतिविधियों और घटनाओं पर निश्चित रूप से पड़ता है जो निर्धारित होते हैं, क्योंकि ये गतिविधियाँ स्थिरता का संकेत देती हैं। इसलिए, स्थिर करण का चयन करते समय यह ध्यान में रखना आवश्यक है कि यह किस प्रकार की गतिविधियों के लिए उपयुक्त है।
गतिशील करण, जिन्हें जंगम करण भी कहा जाता है, वे करण होते हैं जो चंद्रमा के साथ चलते हैं, जबकि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है। इन करणों की स्थिति समय के अनुसार बदलती रहती है, और प्रत्येक करण के अपने विशिष्ट प्रभाव होते हैं। इन प्रभावों के आधार पर विभिन्न आवश्यक कार्यक्रम, उत्सव, और समारोहों की योजना बनाई जाती है।
करण को उनकी उपयुक्तता और प्रभाव के आधार पर निम्नलिखित प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है:
अंत में, विशेष करण जैसे कि विष्टि और भद्रा का भी है, जिसका प्रभाव खास परिस्थितियों में देखा जाता है।
इस प्रकार, करण का सही ज्ञान और समझ किसी भी गतिविधि या समारोह के लिए शुभ समय का निर्धारण करने में अत्यंत सहायक हो सकती है। यह न केवल कार्यक्रम की सफलता को सुनिश्चित करता है, बल्कि व्यक्ति के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बन सकता है।
तिथि हिंदू कैलेंडर में चंद्र आधारित दिन है। यह सूरज और चांद के बीच एंगुलर संबंध को दिखाता है और इसका इस्तेमाल रस्मों, व्रतों और त्योहारों के लिए शुभ और अशुभ समय तय करने के लिए किया जाता है। हर तिथि का अपना महत्व और आध्यात्मिक असर होता है।
वैदिक ज्योतिष में नक्षत्र का मतलब 27 नक्षत्रों से है। हर नक्षत्र पर्सनैलिटी, रोजाना के कामों और ज़रूरी घटनाओं के समय पर असर डालता है। शादियों, बिज़नेस और दूसरे समारोहों के लिए अच्छा नक्षत्र चुनना जरूरी माना जाता है।
राहु काल हर दिन का एक खास समय होता है जिसे अशुभ माना जाता है। यह छाया ग्रह राहु से जुड़ा है और आमतौर पर नए काम, यात्रा या जरूरी काम शुरू करने के लिए इससे बचा जाता है। रोजाना के काम जारी रह सकते हैं, लेकिन बड़ी शुरुआत आमतौर पर टाल दी जाती है।
रोज़ाना का पंचांग किसी खास जगह के लिए सूरज, चांद और ग्रहों की स्थिति जैसे खगोलीय डेटा के साथ-साथ सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का इस्तेमाल करके गणना की जाती है। यह दिन को तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार में बांटता है, जो मिलकर शुभ और अशुभ समय तय करते हैं।
हां, जगह के हिसाब से पंचांग बदलता है। क्योंकि सूर्योदय, सूर्यास्त और ग्रहों की स्थिति जगह के हिसाब से अलग-अलग होती है, इसलिए तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त और राहुकाल का समय एक शहर से दूसरे शहर में अलग हो सकता है। इसलिए, अपनी जगह के लिए खास तौर पर बनाया गया पंचांग देखना जरूरी है।






